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झारखंड हाई कोर्ट ने 2021 में आदिवासी शख्स के मौत मामले में नए सिरे से जांच के आदेश दिए

लातेहार जिला के गारू थाना के अंतर्गत पिरी गांव के लोग 12 जून 2021 को हर साल की तरह सरहुल पर्व के लिए पारंपरिक शिकार करने घर से निकले थे. इसी बीच सुरक्षाबलों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी.

झारखंड हाई कोर्ट (Jharkhand High Court) ने लातेहार (Latehar) में 12 जून 2021 को पुलिस मुठभेड़ में एक आदिवासी शख्स ब्रह्मदेव सिंह (Brahmdev Singh) की हत्या की लचर पुलिस जांच पर नाराजगी व्यक्त करते हुए तीन महीने में नए सिरे से जांच करने का आदेश दिया है.

आदेश में कहा गया है कि यह सुनिश्चित करना होगा कि ‘राज्य की ताकत’ का इस्तेमाल अपराध करने वाले अपराधियों को बचाने के लिए नहीं किया जाए. कोर्ट ने मृतक के परिवार को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है.

हाई कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि ‘न केवल निष्पक्ष सुनवाई बल्कि निष्पक्ष जांच’ भी संवैधानिक अधिकार का हिस्सा है और कानून का शासन हर किसी के लिए है, चाहे वह कोई भी हो.

झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी ने दोषी पुलिस अधिकारियों को ‘क्लीन चिट’ देने के लिए राज्य पुलिस की कड़ी आलोचना की. साथ ही कहा कि पुलिस अधिकारियों पर कम से कम आईपीसी 304 (गैर इरादतन हत्या) के तहत मामला बनता था लेकिन उन्हें क्लीन चिट दे दी गई.

क्या है मामला?

दरअसल, लातेहार जिला के गारू थाना के अंतर्गत पिरी गांव के लोग 12 जून 2021 को हर साल की तरह सरहुल पर्व के लिए पारंपरिक शिकार करने घर से निकले थे. इसी बीच सुरक्षाबलों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी. इसे नक्सल मुठभेड़ बताया गया. इसमें 24 वर्षीय ब्रह्मदेव सिंह की मौत हो गई.

पुलिस ने शुरू में दावा किया था कि मौत “क्रॉस-फायरिंग” के परिणामस्वरूप हुई और मृतक सहित छह लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई.

वहीं दूसरी तरफ ब्रह्देव सिंह की पत्नी जीरामणी के हस्तक्षेप के बाद पुलिस के खिलाफ हत्या की एक और एफआईआर दर्ज की गई.

जीरामणी ने अपनी शिकायत में कहा है कि जब सुरक्षा बलों ने गोलियां चलाईं तो सिंह और उनके दोस्तों ने अपनी बंदूकें छोड़ दीं और चिल्लाए कि वो माओवादी नहीं हैं. लेकिन सुरक्षा बलों ने उन पर गोलियां चलाना जारी रखा.

जब ब्रह्मदेव सिंह की मौसी मौके पर पहुंची तो उन्होंने सिंह को घायल हालत में लेकिन जीवित देखा. सुरक्षा बलों ने उन्हें वहां से हटा दिया और सिंह को अपने साथ ले गए. बाद में ब्रह्मदेव का शरीर जंगल में मृत पाया गया.

जीरामणी ने यह भी आरोप लगाया है कि जब वह घर से निकला था तो सिंह ने एक अलग रंग की शर्ट पहन रखी थी और सुरक्षा बलों ने “मुठभेड़” के बाद उसके कपड़े बदल दिए.

पुलिस और जीरामणी दोनों द्वारा दायर एफआईआर की जांच बाद में झारखंड के अपराध जांच विभाग (Crime Investigation Department) ने की. जिसने यह स्वीकार करते हुए क्लोजर रिपोर्ट दायर की कि गलती के कारण ब्रह्मदेव की मौत हुई.

इस मामले में सरकार की ओर से बताया गया था कि घटना के दिन पुलिस के साथ नक्सली मुठभेड़ नहीं हुई थी. पुलिस लातेहार के पिरी जंगल में सर्च अभियान चला रही थी. उसी दौरान कुछ यवकों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी. पुलिस ने भी इसके बाद जवाबी फायरिंग की.

जबकि प्रार्थी की ओर से कहा गया कि मृतक ने कोई फायरिंग नहीं की थी. पुलिस ने उसे नक्सली बता हत्या कर दी है.

हाई कोर्ट ब्रह्मदेव सिंह की पत्नी जीरामनी देवी की याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

हाई कोर्ट ने कहा है कि यह स्वीकार किया गया है कि स्वर्गीय ब्रम्हदेव सिंह की मृत्यु पुलिस की गोली से हुई थी. हालांकि फैक्ट्स की गलती (दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामला) और सबूतों की कमी बताते हुए मामले को बंद कर दिया गया है. और इस मामले में अंतिम फॉर्म जमा कर दिया गया है.

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