सूखे खेत, प्यासे आदिवासी- ना सिंचाई के साधन, ना पीने को साफ़ पानी

AKRSPI और ABF ने सरकारों द्वारा किए गए सिंचाई निवेश को प्रदर्शित करने के लिए मध्य भारतीय क्षेत्र पर एक व्यापक अध्ययन किया है. इसके अलावा यह रिपोर्ट यह भी बताती है कि आदिवासी इलाकों की भौगोलिक स्थिति को देखकर बड़े बांध, लिफ्ट सिंचाई योजनाएं, अच्छी तरह से खोदने वाली योजनाएं और अन्य जल-केंद्रित योजनाएं या और किस प्रकार की आवश्यकताएं हैं.

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आदिवासी क्षेत्रों में खेतीबाड़ी के लिए पानी के इस्तेमाल के लिए अपनाई जाने वाले तरीकों पर एक रिपोर्ट ने इन क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं की कमी को उजागर किया है.

‘जनजातीय क्षेत्रों में सर्वोत्तम प्रथाओं के जल प्रबंधन का संग्रह’ शीर्षक वाली रिपोर्ट ने देश भर में आदिवासी समुदायों के लिए कृषि जल के लिए शासन और संसाधन आवंटन की बढ़ती जरूरत पर जानकारी दी है.

आगा ख़ान रूरल सपोर्ट प्रोग्राम इंडिया (AKRSPI) और एक्सिस बैंक फाउंडेशन (ABF) द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में मध्य भारत को शामिल किया गया है, जो कि देश की 70 फीसदी आदिवासी आबादी का घर है. जो आठ राज्यों के 100 से अधिक जिलों में फैली हुई है. राजस्थान के बांसवाड़ा से लेकर पश्चिम बंगाल के पुरुलिया तक फैला हुआ है.

रिपोर्ट में कहा गया है, “इन आदिवासी क्षेत्रों में सिंचाई के तहत क्षेत्र का प्रतिशत गैर-आदिवासी क्षेत्रों का आधा है. इसके अलावा इन भौगोलिक क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. जैसे कि पहाड़ी इलाके और ढलान वाली कृषि भूमि, जो भूजल भंडारण के लिए अनुपयुक्त हो जाती है और शुष्क मौसम के दौरान उन तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है.”

इन टिप्पणियों के आधार पर AKRSPI और ABF ने सरकारों द्वारा किए गए सिंचाई निवेश को प्रदर्शित करने के लिए मध्य भारतीय क्षेत्र पर एक व्यापक अध्ययन किया है. इसके अलावा यह रिपोर्ट यह भी बताती है कि आदिवासी इलाकों की भौगोलिक स्थिति को देखकर बड़े बांध, लिफ्ट सिंचाई योजनाएं, अच्छी तरह से खोदने वाली योजनाएं और अन्य जल-केंद्रित योजनाएं या और किस प्रकार की आवश्यकताएं हैं.

AKRSPI के सीईओ अपूर्व ओझा ने कहा, “हमारे पास अच्छी बारिश के बावजूद खराब जल नियंत्रण के चलते आदिवासी गरीबी की एक अजीब समस्या है. हम समय के साथ बेहतरीन उपायों के साथ समाधानों को बढ़ाकर इस समस्या का समाधान कर सकते हैं.”

इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मध्य भारत के आदिवासी इलाक़ों में कुछ एनजीओ पीने के साफ़ पानी और आजीविका के क्षेत्र में अच्छा काम भी कर रहे हैं. इस रिपोर्ट में कई तरह के सुझाव दिए गए हैं.

मसलन इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कई ऐसे सिंचाई के उपाय किए जा सकते हैं, जिससे आदिवासी इलाक़ों में बेहतर जल प्रबंधन हो सकता है. इसके साथ खेती के लिए सिंचाई से जु़ड़े बुनियादी ढांचा तैयार करने या उसे मजबूत करने के बारे में इस रिपोर्ट में बातचीत की गई है.

वहीं एक्सिस बैंक फाउंडेशन के सीईओ ध्रुवी शाह ने कहा, “जल सुरक्षा ग्रामीण समुदायों की प्राथमिक चुनौतियों में से एक है. जहां जनजातीय क्षेत्रों में जल नियंत्रण के लिए अधिक संसाधन आवंटित करना अहम है, वहीं यह भी महत्वपूर्ण है कि संसाधनों का इस्तेमाल अधिक प्रभावशीलता के लिए किया जाए. यह संग्रह नीति-निर्माताओं, चिकित्सकों और गैर सरकारी संगठनों को एक अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा, क्योंकि वे मध्य-भारतीय आदिवासी बेल्ट के कुछ सबसे गरीब क्षेत्रों में जल सुरक्षा को बढ़ाने की कोशिश करते हैं.”

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