विशाखापत्तनम: लिंगपुरम के आदिवासियों ने सड़क की मांग को लेकर दिया धरना

पुल पार करने के बाद लिंगपुरम जाने वालों को कच्चे रास्ते पर करीब डेढ़ किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है.

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विशाखापत्तनम की नरसीपट्टनम नगर पालिका के वार्ड नंबर तीन के तीन गांवों में से एक लिंगपुरम तक कोई पक्की सड़क नहीं जाती.

वार्ड की कुल आबादी 2,000 है, जिसमें से 550 आदिवासी हैं, जो लिंगपुरम गांव में रहते हैं. गिरिजन संघम के नेताओं का आरोप है कि अधिकारियों की उदासीनता की वजह भी यही है कि आदिवासी यहां रहते हैं.

नदी के दूसरी ओर स्थित लिंगपुरम तक पहुँचने के लिए बालीघाटम से वरहा नदी पर एक पुल का निर्माण किया गया था. हालांकि, पुल पार करने के बाद लिंगपुरम जाने वालों को कच्चे रास्ते पर करीब डेढ़ किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है.

खासकर मॉनसून के दौरान वाहन चालकों के लिए यह बेहद मुश्किल हो जाता है.

गिरिजन संघम 5वीं अनुसूची साधना समिति के नेता के गोविंदा राव कहते हैं कि मॉनसून के दौरान, लिंगपुरम के ग्रामीण बीमार व्यक्तियों को ‘डोलियों’ में ले जाने के लिए मजबूर होते हैं क्योंकि जो कच्ची सड़क है, वो पानी में डूब जाती है.

जब जिला कलेक्टर ने 11 अक्टूबर, 2021 को नरसीपट्टनम में ‘स्पंदना’ कार्यक्रम आयोजित किया था, तो आदिवासी लोगों ने उन्हें अपने गांव के लिए सड़क निर्माण की मांग के लिए अभ्यावेदन दिया था. कलेक्टर ने नरसीपट्टनम नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था.

आयुक्त ने 11 अक्टूबर को बताया कि चूंकि नगर पालिका के पास सड़क के निर्माण के लिए फंड आवंटित नहीं है, इसलिए अगले बाद में पहली प्राथमिकता सड़क के निर्माण को दी जाएगी. सड़क निर्माण में 21 लाख रुपये की लागत का अनुमान है.

गिरिजन संघम के नेताओं ने कहा कि 14वें वित्त आयोग ने विकास कार्यों के लिए नगर पालिका को 3 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की थी. लेकिन, नगर निगम के अधिकारी सड़क निर्माण के लिए धन आवंटित नहीं कर रहे हैं.

सोमवार को हुई नगर परिषद की बैठक के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर आदिवासियों ने धरना दिया.

पहले लिंगपुरम के आदिवासी लोगों को रोजगार आश्वासन योजना (ईएएस) के तहत साल में 10 दिन काम मिलता था, और ग्रामीणों को वन अधिकार पट्टादार पासबुक भी दी जाती थी.

2014 में, गांव को नरसीपट्टनम नगर पालिका में जोड़ दिया गया था, जिसके बाद ग्रामीणों को ईएएस के तहत रोजगार मिलना भी बंद हो गया.

आदिवासियों को उम्मीद थी कि नगर पालिका में विलय से उनके गांव का विकास सुनिश्चित होगा. अब उनकी मांग है कि नरसीपट्टनम नगर पालिका बिना किसी और देरी के सड़क के निर्माण से विकास का काम शुरू करे.

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