आदिवासी इलाक़ों में 2025 तक पूरा हो सड़कों का निर्माण कार्य: विशाखापत्तनम कलेक्टर

एक बैठक में सड़क संपर्क के अलावा पेयजल और बिजली की आपूर्ति जैसे मुद्दों को उठाया गया. इस परियोजना के तहत 4400 किलोमीटर से ज़्यादा सड़कों का निर्माण किया जाना है. कलेक्टर ने ज़िले के दुर्गम आदिवायी गांवों में बिजली कनेक्शन और पेयजल आपूर्ति पर भी रिपोर्ट मांगी है.

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विशाखापत्तनम के एजेंसी इलाक़े में सड़क संपर्क में सुधार करने के लिए ज़िला कलेक्टर, डॉ ए मल्लिकार्जुन ने सड़कों के निर्माण का काम पूरा करने के लिए 2025 की समय सीमा तय कर दी है. इस परियोजना के तहत 4400 किलोमीटर से ज़्यादा सड़कों का निर्माण किया जाना है.

कलेक्टर ने यह निर्देश एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसी (ITDA), ग्राम पंचायतों, सड़क और भवन विभाग और ग्रामीण जल आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के साथ एक बैठक में दिए. कलेक्टर ने अधिकारियों को विशाखापत्तनम एजेंसी इलाक़े के अंदरूनी आदिवासी गांवों में जल्द से जल्द सड़क संपर्क स्थापित करने के लिए कहा.

बैठक के दौरान सड़क संपर्क के अलावा पेयजल और बिजली की आपूर्ति जैसे मुद्दों को उठाया गया. कलेक्टर ने ज़िले के दुर्गम आदिवायी गांवों में बिजली कनेक्शन और पेयजल आपूर्ति पर भी रिपोर्ट मांगी है.

इसके अलावा आईटीडीए के अधिकारियों को एपी फाइबरनेट सेवाओं को स्थापित करने के लिए कहा गया है. इससे एजेंसी इलाक़ों में पहचाने गए 110 ग्राम सचिवालयों में लोगों को एक स्थिर इंटरनेट कनेक्शन दिया जा सकेगा. महामारी के दौरान इंटरनेट की कमी आदिवासी बच्चों को बहुत भारी पड़ी है. पिछले डेढ़ साल में स्कूलों के ऑनलाइन शिफ़्ट होने के बाद आदिवासी बच्चों के स्कूल ड्रॉपआउट रेट में काफ़ी इज़ाफ़ा हुआ है.

सड़क संपर्क पर ज़ोर के पीछे पिछले कुछ महीनों में इन इलाक़ों में हुई कुछ ग्रामीणों की मौतें हैं. एजेंसी इलाक़ों के लोगों की बड़ी शिकायत है कि पक्की सड़कों के अभाव में कई बार आपात स्थिति में एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती.

पिछले कुछ दिनों में ही हमारी वेबसाइट पर हमने ऐसी कई ख़बरें छापी हैं. कम से कम दो गर्भवती आदिवासी महिलाओं की मौत हुई है, क्योंकि उन्हें समय से अस्पताल नहीं ले जाया जा सका. इसके अलावा बच्चों को भी स्कूल तक पहुंचने के लिए कच्ची सड़कों पर जोखिम भरा सफ़र तय करने पड़ता है.

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