बारेला आदिवासियों के साथ ‘सिरी पाया’ और कुछ बातें बनी

12-14 साल के लड़के लड़कियों में शायद ही कोई होता है जिसकी शादी नहीं हो चुकी है. इसकी बड़ी वजह है कि लड़के के माँ बाप को यह डर सताता रहता है कि कहीं उनका लड़का किसी लड़की को भगा कर ना ले आए. उस सूरत में लड़के के परिवार को वधु मूल्य के तौर पर लड़की के परिवार को बड़ी रक़म चुकानी पड़ती है. इस तरह के मसलों में पंचायत और पुलिस भी शामिल हो जाती है, जिस पर अलग से रूपया ख़र्च होता है.

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बारेला दरअसल भील आदिवासी समुदाय का ही एक समूह है. मध्य प्रदेश के खरगोन, बड़वानी, अलिराजपुर, झाबुआ में भील आदिवासियों की काफ़ी आबादी है. इसके अलावा भी ये आदिवासी राज्य के कई और ज़िलों में भी रहते हैं.

खरगोन के एक गाँव थऱड़पुरा में हमने इन आदिवासियों के साथ कुछ समय बिताया. इस दौरान हमने इनके साथ बकरे का सिर और पाए पकाने का नायाब तरीक़ा भी सीखा. खाना बनाते समय कई मसलों पर इन आदिवासियों से बातचीत भी हुई.

इस बातचीत में कई जानकारी हमें मिलीं. मसलन बारेला, भील आदिवासियों में बाकियों से थोड़े से बेहतर स्थिति में हैं. इस समूह में ज़्यादातर के पास ज़मीनें हैं. लेकिन इसके बावजूद इन आदिवासियों में भी ज़्यादातर परिवार क़र्ज़ में डूबे मिलते हैं.

अभी भी इन आदिवासियों को बैंक क़र्ज़ देने से बचते हैं और इन्हें साहूकारों से ही क़र्ज़ लेना पड़ता है.

इसके अलावा इस बातचीत में हमें यह भी पता चला कि कम उम्र में शादी और ब्राइड प्राइस यानि वधु मूल्य भी अब इस समुदाय में एक बड़ी समस्या बन चुकी है. हमारी इस गाँव में कई परिवारों से बातचीत हुई और हमने यह पाया कि ये परिवार अपने बच्चों की शादी बहुत जल्दी कर देते हैं.

12-14 साल के लड़के लड़कियों में शायद ही कोई होता है जिसकी शादी नहीं हो चुकी है. इसकी बड़ी वजह है कि लड़के के माँ बाप को यह डर सताता रहता है कि कहीं उनका लड़का किसी लड़की को भगा कर ना ले आए.

क्योंकि उस सूरत में लड़के के परिवार को वधु मूल्य के तौर पर लड़की के परिवार को बड़ी रक़म चुकानी पड़ती है. इस तरह के मसलों में पंचायत और पुलिस भी शामिल हो जाती है, जिस पर अलग से रूपया ख़र्च होता है.

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