सत्यमंगलम टाइगर रिज़र्व में पशुधन खोने पर आदिवासियों को मिलेगा मुआवज़ा

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सत्यमंगलम टाइगर रिज़र्व के पहाड़ी गांवों में रहने वाले आदिवासी और जंगल में रहने वाले अन्य समुदाय पशुधन पर निर्भर हैं. लेकिन अकसर बाघ और तेंदुए जैसे जंगली जानवर इनके पशुओं को मार देते हैं.

ऐसी स्थिति में राज्य सरकार द्वारा मुआवज़ा दिए जाने का प्रावधान है. तलवाडी आदिवासी मुन्नेत्र संघम (TAMS) ने WWF-इंडिया की मदद से पशुधन मालिकों के लिए इस स्कीम को सत्यमंगलम टाइगर रिज़र्व में लॉन्च किया है.

उम्मीद की जा रही है कि इस क़दम से रिज़र्व के आसपास इन जंगली जानवरों की हत्या को कम किया जा सकेगा, जो मानव-पशु संघर्ष की वजह से होती हैं.

यह स्कीम कर्नाटक के बांदीपुर टाइगर रिज़र्व में पहले से ही लागू है, और इसे वहां काफ़ी सफलता भी मिली है. बांदीपुर टाइगर रिज़र्व में पिछले 13 वर्षों से एक चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा इस स्कीम को चलाया जा रहा है.

इस स्कीम के चलते वन्यजीव संरक्षण में सार्वजनिक भागीदारी भी बढ़ी है.

सत्यमंगलम टाइगर रिज़र्व में इरुला और सोलीगा आदिवासी समुदाय रहते हैं. इस संरक्षित क्षेत्र के अंदर सात वन बस्तियां हैं, और 12 रेवेन्यू बस्तियां हैं. 2013 में रिज़र्व के आसपास के 5 किलोमीटर के दायरे में 138 गांवों में 900 से अधिक आदिवासी परिवार रह रहे थे.

सत्यमंगलम टाइगर रिज़र्व में इरुला और सोलीगा आदिवासी रहते हैं

यह आदिवासी इस इलाक़े में खेती करते हैं, जानवरों के चराते हैं, और जंगल से शहद, कांदा, लकड़ी और मछली जैसी वन उपज इकट्ठा करते हैं. फ़ॉरेस्ट राइट्स एक्ट के तहत, इन आदिवासियों को खेती के लिए रिज़र्व के अंदर की भूमि पर अधिकार है.

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