केरल: वायनाड के आदिवासियों की शिक्षा और स्वास्थ ज़रूरतों पर ख़ास ध्यान की ज़रूरत

दुर्गम इलाक़ों में रहने वाले आदिवासियों को प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं प्रदान करने के लिए, पूरे राज्य में 13 आदिवासी मोबाइल चिकित्सा यूनिट कार्यरत हैं. इनमें से पांच वायनाड जिले में, दो-दो इडुक्की और पालक्काड जिलों में, और एक-एक कासरगोड, मलप्पुरम, कण्णूर और तिरुवनंतपुरम जिलों में काम कर रही हैं.

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केरल के स्थानीय स्वशासन (शहरी एवं ग्रामीण) विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव शारदा मुरलीधरन ने कहा है कि राज्य के वायनाड ज़िले में आदिवासी बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है.

सोमवार को हुई जिला योजना समिति की बैठक के बाद शारदा मुरलीधरन ने आदिवासी बच्चों के स्कूल ड्रॉपआउट रेट को कम करने के लिए शुरु की गई गोत्र सारथी योजना से जुड़े मुद्दों को हल करने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया. यह योजना दुर्गम इलाक़ों में रहने वाले आदिवासी बच्चों की स्कूल तक पहुंचने की मुश्किलों को दूर करने और उन्हें सुरक्षित परिवहन की सुविधा देने के लिए शुरु की गई थी.

मुरलीधरन ने यह भी कहा कि संबंधित विभागों को परियोजना के लिए धनराशि निर्धारित करनी चाहिए, और दुर्गम आदिवासी बस्तियों के बच्चों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

इसके अलावा जिला योजना समिति द्वारा परियोजना के लिए आदिवासी विकास विभाग और स्थानीय प्रशासनिक निकायों के फ़ंड आवंटन का आकलन करने की ज़रूरत पर भी उन्होंने ज़ोर दिया.

वायनाड के आदिवासियों का स्वास्थ

केरल की कुल आबादी का 1% से ज़्यादा हिस्सा आदिवासियों से है, और राज्य में कुल 35 आदिवासी समुदाय हैं. उनमें से 22% अभी भी घने जंगलों में रह रहे हैं. 1,36,062 आदिवासी आबादी के साथ वायनाड में सबसे ज़्यादा आदिवासी हैं, 50,973 के साथ इडुक्की जिला दूसरे नंबर पर है, और 39,665 आदिवासी लोगों के साथ पालक्काड जिला तीसरे स्थान पर है.

दुर्गम इलाक़ों में रहने वाले आदिवासियों को प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं प्रदान करने के लिए, पूरे राज्य में 13 आदिवासी मोबाइल चिकित्सा यूनिट कार्यरत हैं. इनमें से पांच वायनाड जिले में, दो-दो इडुक्की और पालक्काड जिलों में, और एक-एक कासरगोड, मलप्पुरम, कण्णूर और तिरुवनंतपुरम जिलों में काम कर रही हैं.

ये यूनिट एक चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में आदिवासी बस्तियों में हर महीने औसतन 20 चिकित्सा शिविर आयोजित करती हैं, जिसमें सहायक पैरा-मेडिकल स्टाफ जैसे फार्मसिस्ट, स्टाफ नर्स आदि शामिल होते हैं.

इन स्वास्थ शिविरों में आदिवासी समुदायों की प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की जरूरतें जैसे बुनियादी बीमारियों का इलाज, प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर देखभाल, टीकाकरण सेवाएं, संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण आदि दी जाती हैं.

प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेटिंग में सिकल सेल रोग के लिए व्यापक स्वास्थ्य देखभाल भी की जाती है. इसके तहत वायनाड और पालक्काड जिले के आदिवासी इलाक़ों में विशेष परियोजना चलाई जा रही है. सिकल सेल रोग के निदान, जटिलताओं की शीघ्र पहचान और मृत्यु दर को कम करने की कोशिशें भी की जाती हैं.

केरल के आदिवासियों की शिक्षा

वायनाड के आदिवासियों की शिक्षा से जुड़ी कुछ ख़ास और व्यापक चुनौतियाँ हैं. इनमें सुविधाओं की कमी, भाषा या शिक्षा का माध्यम यहां के आदिवासी बच्चों के लिए एक बड़ी चुनौती है. इन्हें उचित शिक्षा देने के लिए ज़ूरीर किताबों की भी कमी है.

आदिवासी बच्चे मलयालम भाषा को एक विदेशी भाषा के रूप में देखते हैं, और सरकार द्वारा दिए जाने वाले संसाधनों के बावजूद इनका परिणाम नाकाफ़ी है. चुनौतियों में कई सामाजिक और आर्थिक कारक हैं. इसके अलावा औपचारिक शिक्षा में रुचि की कमी और शिक्षकों की कमी भी एक बड़ा कारण है.

एक अध्ययन में पाया गया है कि राज्य में अनपढ़ आदिवासियों की कुल संख्या 98,386 है. उनमें से 40% वायनाड जिले में हैं, 18.03% पालक्काड ज़िले में और 11.94% कासरगोड जिले में.

विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों यानि पीवीटीजी के बीच अनपढ़ लोगों की कुल संख्या 9,127 है, जो आदिवासियों में कुल निरक्षरता का 9.28% हिस्सा है. पीवीटीजी समुदायों में अनपढ़ लोगों का अनुपात दूसरे जनजातीय समूहों की तुलना में ज़्यादा है, इसलिए आदिवासियों की साक्षरता दर में सुधार लाने के मकसद से चलाए जाने वाले किसी भी कार्यक्रम का लक्ष्य पीवीटीजी होना चाहिए.

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