50 साल में पहली बार आदिवासी डालेंगे अपने ही गांव में वोट, स्थानीय निकाय चुनावों के तीसरे दौर का मतदान कल

इन दुर्गम और नक्सल-प्रभावित पोलिंग बूथों पर लगभग 600 मतदाता हैं. बीते सालों में इन आदिवासियों को अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए कोइड़ा गांव में एक दिन बिताना पड़ता था.

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आंध्रप्रदेश के पश्चिम गोदावरी एजेंसी क्षेत्र के सैकड़ों कोंडारेड्डी और कोया आदिवासी बुधवार सुबह का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं. वजह है पहली बार अपने ही गांवों में वोट डालने की सुविधा.

पेरंटालपल्ली, काकिसानुरू और तेकुपल्ली गावों के इन आदिवासियों को पिछले 50 वर्षों से अपना वोट डालने के लिए लंबा पहाड़ी रास्ता और गोदावरी नदी पार करके कोइड़ा गाँव जाना पड़ता था.

लेकिन अब राज्य निर्वाचन आयोग और ज़िला निर्वाचन अधिकारी ने दुर्गम इलाक़ों में स्थित इन तीन आदिवासी गावों में ही पंचायत चुनावों के तीसरे चरण का मतदान कराने का फैसला किया. यह इलाका नक्सल प्रभावित भी है.

इन दुर्गम और नक्सल-प्रभावित पोलिंग बूथों पर लगभग 600 मतदाता हैं. बीते सालों में इन आदिवासियों को अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए कोइड़ा गांव में एक दिन बिताना पड़ता था.

इस बार इन आदिवासियों को इस परेशानी से बचाने के लिए, लगभग 50 चुनाव अधिकारियों और मतदान सामग्री को इन तीन गांवों में पहुंचा दिया गया है.

कोंडारेड्डी आदिवासी पीवीटीजी की श्रेणी में आते हैं, यानि वो आदिम जनजाति है

मतदान के लिए आंध्रप्रदेश और तेलंगाना की पुलिस ने समन्वय में सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ा दी है.

पुलिस ने इन दुर्गम बस्तियों को अपने नियंत्रण में ले लिया है, ताकि यहां बसे आदिवासी मतदाता बिना डरे अपना मताधिकार पूरा कर सकें. उधर, कोइड़ा गांव में काउंटिंग के इंतज़ाम भी पूरे कर लिए गए हैं.

यह पंचायत चुनाव दरअसल पिछले साल मार्च में महामारी की वजह से अचानक बीच में रोक दिए गए थे.

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