लिम्बू-तमांग समुदायों ने सिक्किम विधानसभा में 6 अलग जनजातीय सीटों की मांग पर जोर दिया

2002 में लिम्बू-तमांग समुदाय को संसद से अनुसूचित जनजाति की मान्यता मिली थी. इस समुदाय के लिए विधान सभा सीटों के आरक्षण का मामला 2008 से लंबित है.

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सिक्किम लिम्बू तमांग एपेक्स कमेटी (Sikkim Limboo Tamang Apex Committee) ने सिक्किम विधानसभा में 6 अलग लिम्बू तमांग आदिवासी सीटों की मांग को जोर दिया है. एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए एसआईएलटीएसी के अध्यक्ष सीबी सुब्बा ने कहा कि हमने अपना ज्ञापन एमपी और सरकार को सौंप दिया है.

उन्होने कहा कि उनका सरकार से अनुरोध है कि इस प्रस्ताव को सिक्किम विधानसभा के रिकॉर्ड में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव के रूप में पारित किया जाए.

इस तरह विधानसभा में नई अनुसूचित जनजाति सीटों (ST Seats) को स्वतंत्र रूप से और विशेष रूप से साफ-सुथरे तरीके से (बिना छुए, परेशान किए, नुकसान पहुंचाए और कोई विवाद किए बिना) सिक्किम की विधान सभा में पहले से मौजूद कुल सीटों और आरक्षित सीटों के रूप में- एससी सीटें- 2; बी.एल. सीटें (1 संघ सीट सहित) – 13; सामान्य सीटें- 17) आवंटित की जाएँ.

इस तरह से सिक्किम के लिम्बू-तमांग अनुसूचित जनजातियों के लिए ‘अनुसूचित जनजाति सीटों की न्यूनतम संख्या 6 कर दें.

उन्होंने कहा कि क्योंकि यह मुद्दा विशेष रूप से केंद्रीय विषय है तो इस लंबे समय से की जा रही संवैधानिक मांग को पूरा करने के लिए तत्काल कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार को भेजें. उन्होंने कहा कि 2024 के चुनाव से पहले अनुच्छेद 332 के तहत निर्धारित सिद्धांत को गहराई से ध्यान में रखते हुए भारत के संविधान के अनुच्छेद 371F (f) के विशेष प्रावधान का पालन किया जाना चाहिए.

फ़िलहाल सिक्किम विधानसभा में 32 विधान सभा सीटें हैं.

इस बीच, पूर्व अध्यक्ष और SILTAC के सदस्य, कलावती सुब्बा ने कहा कि पहले की सरकारों ने सीट आरक्षण के लिए काम करने की कोशिश की थी. यह मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय और अनुसूचित जनजाति के राष्ट्रीय आयोग तक भी पहुंच गया था.

लेकिन उन्होंने कहा कि कई लोगों ने प्रस्ताव के फार्मूले का विरोध किया है. लेकिन अब एसकेएम सरकार भी इस मामले को गंभीरता से ले रही है और इसलिए हमने मामले की जल्द स्वीकृति के लिए ज्ञापन भी प्रस्तुत किया है.

लिम्बू और तमांग समुदायों ने 2003 से सिक्किम विधानसभा में सीटों के आरक्षण में देरी के लिए कड़ी प्रतिक्रिया दी थी.

वहीं इस मामले को आगे बढ़ाने के लिए एक परामर्श समिति के अलावा, लिम्बू और तमांग सीट आरक्षण पर एसकेएम परामर्श समिति का भी गठन किया गया है. जिसकी अध्यक्षता लोकसभा सांसद इंद्र हैंग सुब्बा कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री प्रेम सिंह गोले के निर्देश के मुताबिक परामर्श समिति, लिम्बू और तमांग समुदायों के विभिन्न संघों और राज्य भर के हितधारकों (stake holders) के साथ इनपुट इकट्ठा करने के लिए कई बैठकें कर रही है.

इस जानकारी को बाद में मुख्यमंत्री को प्रस्तुत किया जाएगा. इसके अलावा, SILTAC के प्रतिनिधियों ने हाल ही में इस मामले पर सांसद इंद्र हैंग सुब्बा के साथ बैठक की थी.

2002 में लिम्बू-तमांग समुदाय को संसद में अनुसूचित जनजाति की मान्यता मिली थी. इसके बाद आठ जनवरी 2003 को इसके लिए बाकायदा अध्यादेश जारी हुआ. फिर संविधान की धारा 332 के तहत अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया गया. इसके बाद 2006 में क्षेत्र का सीमांकन हुआ. इस दौरान भी लिम्बु-तमांग जनजाति समुदाय के लिए सीटों का आरक्षण तय नहीं किया गया.

इसके बाद राज्य सरकार ने बीके राय बर्मन कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर 40 सीट बढने के बाद ही पांच सीट लिम्बु-तमांग को आरक्षित करने के प्रस्ताव को 2008 में केंद्र सरकार के पास भेज दिया. इसी वजह से आरक्षण प्रक्रिया पूरी तरह लंबित हो गई.

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