असम के आदिवासी मुद्दों को हल करने के लिए हिमंत बिस्वा सरमा बनाएंगे कैबिनेट कमेटी

हिमंत बिस्वा ने मांगों को देखने के बाद घोषणा की कि सीसीटीओए के साथ जुड़ने के लिए तीन सदस्यीय कैबिनेट कमेटी का गठन किया जाएगा और यह असम में आदिवासी लोगों के भूमि अधिकारों और अन्य मुद्दों के निपटारे के लिए त्वरित कदम उठाने के लिए संगठन के साथ अक्सर चर्चा करेगा.

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा आदिवासी लोगों के सभी मुद्दों को हल करने की तैयारी कर रहे हैं. असम सरकार इन मुद्दों पर चर्चा करने और उन्हें हल करने के लिए तीन सदस्यीय कैबिनेट समिति बनाएगी.

हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को घोषणा की कि असम में आदिवासी लोगों के सभी लंबित मुद्दों पर चर्चा और समाधान के लिए तीन सदस्यीय कैबिनेट समिति का गठन किया जाएगा.

हिमंत बिस्वा ने आदिवासी लोगों के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए असम के जनजातीय संगठनों की समन्वय समिति (CCTOA) के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक में भाग लेते हुए यह बात कही. समीक्षा बैठक नंबर 1 स्टेट गेस्ट हाउस, कोइनाधारा में आयोजित की गई थी.

बैठक में एसटी समुदायों के कुल 24 छात्रों और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया. साथ ही असम के शिक्षा मंत्री रनोज पेगू, आवास और शहरी मामलों के मंत्री अशोक सिंघल, बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (BTC) के प्रमुख प्रमोद बोडो, प्रमुख सचिव और राज्य के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे.

सीसीटीओए के प्रतिनिधियों ने असम के मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा. जिसमें आदिवासी बेल्ट और ब्लॉकों के संरक्षण, वनवासियों के भूमि अधिकार और बैकलॉग पदों को भरना, आदिवासी स्वायत्त परिषदों को संवैधानिक दर्जा सहित दस मांगों को रेखांकित किया गया.

हिमंत बिस्वा ने मांगों को देखने के बाद घोषणा की कि सीसीटीओए के साथ जुड़ने के लिए तीन सदस्यीय कैबिनेट कमेटी का गठन किया जाएगा और यह असम में आदिवासी लोगों के भूमि अधिकारों और अन्य मुद्दों के निपटारे के लिए त्वरित कदम उठाने के लिए संगठन के साथ अक्सर चर्चा करेगा.

हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी बताया कि वह अगले छह महीनों में मुद्दों की प्रगति पर सीसीटीओए के साथ चर्चा करेंगे.

हाल ही असम के टी ट्राइब्स के अधिकारों और पहचान से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करने के लिए भी मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सात समितियों के गठन की घोषणा की थी. सरमा ने कहा था कि सात अलग-अलग समितियां स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, संस्कृति, साहित्य, खेल और रोज़गार पर ध्यान देंगी और अपने सुझाव देंगी.

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