ओडिशा: बस सेवा के अभाव में आदिवासी छात्रों के लिए रोज़ कॉलेज जाना हो रहा मुश्किल

खदान क्षेत्र के कालियापानी, कांसा, रांसोल, चिंगुडीपाल और कंकड़पाल ग्राम पंचायतों के 300 से ज़्यादा आदिवासी छात्र अपने गांवों से लगभग 8-15 किलोमीटर दूर स्थित तीन कॉलेजों में पढ़ते हैं. चूंकि इलाक़ो में कोई नियमित बस सेवा नहीं है, यह छात्र हर दिन अपने-अपने कॉलेजों तक पहुंचने के लिए क्रोमाइट से भरे ट्रकों पर निर्भर हैं.

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ओडिशा के जाजपुर ज़िले की सुकिंडा क्रोमाइट्स घाटी के सैकड़ों आदिवासी छात्रों के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी के चलते रोज़ाना कॉलेज तक पहुंचना एक संघर्ष बन गया है. ऐसे में अब उन्होंने खदान क्षेत्र में नियमित बस सेवा शुरू करने की मांग की है.

‘खानी आंचल कॉलेज छात्र संघ’ के बैनर तले छात्रों ने उनकी मांग जल्द पूरी न होने पर विरोध करने के लिए सड़क पर उतरने की चेतावनी दी है. 

खदान क्षेत्र के कालियापानी, कांसा, रांसोल, चिंगुडीपाल और कंकड़पाल ग्राम पंचायतों के 300 से ज़्यादा आदिवासी छात्र अपने गांवों से लगभग 8-15 किलोमीटर दूर स्थित तीन कॉलेजों में पढ़ते हैं. चूंकि इलाक़ो में कोई नियमित बस सेवा नहीं है, यह छात्र हर दिन अपने-अपने कॉलेजों तक पहुंचने के लिए क्रोमाइट से भरे ट्रकों पर निर्भर हैं. 

पिछले साल प्रशासन ने आदिवासी छात्रों की मुश्किलों का पता चलने के बाद ज़िला खनिज फाउंडेशन (District Mineral Foundation) फंड से बस की व्यवस्था की थी. लेकिन एक बस इन सभी छात्रों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए काफ़ी नहीं है. 

कॉलेज की छात्रा प्रतिमा मुंडा ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “कुल 300 में से, लगभग 60 छात्र इस इकलौती बस में यात्रा करते हैं, जबकि बाकी को रोज़ अपने कॉलेज आने-जाने के लिए क्रोमाइट से भरे ट्रकों पर निर्भर रहना पड़ता है.” 

इससे पहले टाटा कंपनी कालियापानी से सुकिंडा कॉलेज के लिए छात्रों के लिए बस सेवा चला रही थी. लेकिन, कंपनी ने पिछले साल अप्रैल से इस बस सेवा को बंद कर दिया.

छात्र नेता शक्तिमान पात्रा ने कहा, “हम छात्रों के हित के लिए टाटा द्वारा बस सेवा को फिर से शुरू करने की मांग करते हैं. अगर जल्द ही नियमित बस सेवा शुरू नहीं की गई तो हम आंदोलन करेंगे.” 

हाल ही में छात्रों ने स्थानीय पुलिस से संपर्क कर इस संबंध में जिला कलेक्टर के लिए एक ज्ञापन सौंपा था. कालियापानी आईआईसी रमाकांत मुदुली ने बताया कि बस सेवा को फिर से शुरू करने के लिए टाटा अधिकारियों के साथ बातचीत चल रही है.

(तस्वीर प्रतीकात्मक है.)

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