बूंद-बूंद को तरसते आदिवासियों की सुनने वाला कोई नहीं, न प्रशासन, न विधायक को है परवाह

इस तेज गर्मी के मौसम में इन आदिवासियों के पास पानी के मुख्य स्रोत के रूप में दो खस्ताहाल हैंडपंप और एक पुराना कुआं ही हैं.

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पूरे देश की तरह तेलंगाना में भी आजकल औसत तापमान 40 डिग्री के पार है. इस भीषण गर्मी के मौसम अगर पानी की भी कमी हो तो हाल आप सोच ही सकते हैं.

यही आजकल लगभग 80 परिवारों वाली एक आदिवासी बस्ती, अडावी रामवरम में हो रहा है, जहां के लोग पीने के पानी की एक एक बूंद को तरस रहे हैं. इस तेज गर्मी के मौसम में इन आदिवासियों के पास पानी के मुख्य स्रोत के रूप में दो खस्ताहाल हैंडपंप और एक पुराना कुआं ही हैं.

लेकिन उनकी यह समस्या अभी सिर्फ गर्मी के मौसम की ही नहीं है, बल्कि उनको साल के बारह महीने इस मुश्किल का सामना करना पड़ता है. आलम यह है कि पानी की कमी के चलते कुछ परिवार गांव छोड़कर जाने को मजबूर हो गए हैं.

यह कोई सुदूर दुर्गम इलाके में बस आदिवासी गांव भी नहीं है. यह गांव अल्लापल्ली के मंडल मुख्यालय से सिर्फ 20 किमी दूर है, जो पिनापाका निर्वाचन क्षेत्र के तहत आता है.

टीआरएस नेता रेगा कनाथ राव इस निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं, लेकिन कई शिकायतों के बावजूद उन्होंने गांव की यह मुश्किल दूर करने के लिए कुछ नहीं किया है.न विधायक का ध्यान है, न अधिकारी इस गांव के लोगों के बारे में सोच रहे हैं.

पानी के लिए की गई कई अपीलों के बाद, अधिकारियों ने यहां दो बोरवेल लगाए. एक में सोलर मोटर लगाई गई है. लेकिन कई दिनों से मोटर भी काम नहीं कर रही है. और सभी निवासी फिर से दो हैंडपंपों पर निर्भर हैं.

अडावी रामवरम में जो इकलौता कुआं है, उसका पानी गंदा है और वो अंदर से पूरी तरह से हरा हो गया है. ऊपर से गर्मी के मौसम में इलाके के भूजल स्तर में भारी गिरावट आती है, जिसकी वजह से कुआं भी सूख जाता है.

हैंडपंप से पानी खींचना भी एक अलग कहानी है. हर निवासी को एक घड़ा भरने के लिए कम से कम आधा घंटा लग जाता है. जाहिर है गांव के लोगों का पूरा पूरा दिन इसी काम में निकल जाता है.

गांव के एक बुजुर्ग पोयम बाबू का कहना है कि लोग सुबह और शाम पानी निकालने के लिए शिफ्ट लगाते हैं. वैसे तो यह लोग जानते हैं कि जो पानी ये निकाल रहे हैं, वो सुरक्षित नहीं है, लेकिन उनके पास दूसरा कोई विकल्प भी नहीं है.

ग्रामीणों ने आईटीडीए के अधिकारियों और जिला कलेक्टर से भी उनकी प्यास बुझाने की अपील की है.

मिशन भगीरथ के सहायक अभियंता (एई) पी किशोर ने कहा कि यह पंचायत वन क्षेत्र में बसी है, इसलिए यह मिशन भगीरथ योजना के तहत नहीं आता. हालांकि, बोरवेल को मंजूरी देने के लिए आईटीडीए परियोजना अधिकारी को एक प्रस्ताव भेजा गया है.

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