कच्चे आम और सुरण के साथ बना लाजवाब देसी मुर्ग़ा

हम भूख से बेदम हो चले थे, लू थोड़ी शांत हो गई थी, सूरज ढल रहा था जब हम कुर्जा बांध के पास के एक गाँव में पहुँचे. यहाँ के एक परिवार ने हमले मिलते ही कहा कि पहले आप कुछ खाएँ, फिर आराम से बातचीत होगी.

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महाराष्ट्र के पालघर ज़िले के आदिवासियों से मिलने का सिलसिला चल रहा था. हमें पहुँचे यहां चार दिन हो गए थे. चौथे दिन यहाँ के आदिवासियों के कई गाँवों में जाना हुआ. दिन भर यहाँ के आदिवासियों की ज़िन्दगी से जुड़े कई अहम मसलों को समझने का प्रयास करते रहे.

धामण गाँव में बुलेट ट्रेन से प्रभावित लोगों से मुलाक़ात हुई तो पासोड़ी पाड़ा में पीने के पानी के लिए घटों मेहनत करने वाली आदिवासी औरतों से मिले. इस दौरान लंबी बातचीत आदिवासियों से हुई थी.

गर्मी इतनी ज़्यादा थी कि पूछिए मत. चारों तरफ़ एक हरा तिनका नज़र ना आ रहा था. हवा लपटों में तब्दील हो चुकी थीं. लेकिन यहाँ के कई आदिवासी ‘मैं भी भारत’ के नियमित दर्शक मिले.

वो चाहते थे कि हम उनके हर गाँव में जाएँ और वहाँ उनके सभी मसलों को समझने की कोशिश करें. हमने पूरा प्रयास किया कि जितने भी गाँवों में हम जा सकें और उनकी बात सुन सकें. इस क्रम में पूरा दिन निकल गया.

हम भूख से बेदम हो चले थे, लू थोड़ी शांत हो गई थी, सूरज ढल रहा था जब हम कुर्जा बांध के पास के एक गाँव में पहुँचे. यहाँ के एक परिवार ने हमले मिलते ही कहा कि पहले आप कुछ खाएँ, फिर आराम से बातचीत होगी.

जो खाना बन रहा था वो बेहद ख़ास था, सो हमें लगा कि आप भी जानना चाहेंगे कि यह ख़ास खाना क्या था…तो देखिए उपर लगाया गया वीडियो

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