आदिवासी महिला के बलात्कार मामले के जाँच अधिकारी ने भी वही किया, गिरफ्तार हुए

जाँच अधिकारी इस महिला को एक विवाह समारोह से अपनी मोटरसाइकिल पर बिठाकर जंगल में ले गया, जहां उसने कथित तौर पर महिला से बलात्कार किया. पुलिस ने शिकायत का हवाला देते हुए कहा कि इसके बाद वह उसे वापस समारोह स्थल पर छोड़ने आया और उसके पति को देखकर भाग गया.

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Rajasthan ASI Arrested: राजस्थान के झालावाड़ जिले में 25 वर्षीय आदिवासी महिला से बलात्कार के आरोप में एक पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने गुरुवार को मीडिया को यह जानकारी दी. पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि भालटा थाने में सहायक पुलिस उपनिरीक्षक आरोपी जगदीश प्रसाद एक जाँच अधिकारी थे.

यह पुलिस अधिकार उस मामले की जाँच कर रहे थे जो बलात्कार पीड़िता ने जनवरी में अपने ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज कराया था.

पीड़िता ने आरोप लगाया कि जनवरी से प्रसाद जांच की आड़ में बार-बार फोन करके उसे परेशान कर रहा था. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रसाद छह महीने में रिटायर होने वाला है. पुलिस ने कहा कि सोमवार रात वह एक गांव में विवाह समारोह में शामिल हुई. 

प्रसाद ने उसे बाहर बुलाया और अपनी मोटरसाइकिल पर बिठाकर जंगल में ले गया, जहां उसने कथित तौर पर महिला से बलात्कार किया. पुलिस ने शिकायत का हवाला देते हुए कहा कि इसके बाद वह उसे वापस समारोह स्थल पर छोड़ने आया और उसके पति को देखकर भाग गया.

महिला ने आपबीती पति को सुनाई, जिसके बाद मंगलवार शाम उन्होंने प्रसाद के खिलाफ उसी थाने में शिकायत दर्ज कराई, जहां वह तैनात है. पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2) (ए) (i) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मामला दर्ज किया गया है. 

पुलिस ने दावा किया कि इस मामले में 24 घंटे के भीतर  आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने बताया है कि मेडिकल जांच के बाद बुधवार को मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता का बयान दर्ज किया गया. पुलिस ने गिरफ़्तार एएसआई की रिमांड नहीं माँगी है. पुलिस का कहना है कि इस मामले में वह पहले ही प्रारंभिक जांच कर चुकी है.

इस मामले में बेशक पुलिस अपनी कार्रवाई में तत्पर होने का दावा कर रही है. लेकिन यह सवाल तो मौजूद रहेगा कि एक आदिवासी महिला जो बलात्कार का शिकार थी, उसे न्याय दिलाने की ज़िम्मेदारी तो पुलिस की थी. लेकिन पुलिस ने उसके साथ क्या किया..वही जो अपराधियों ने किया था.

यह सवाल भी मौजूद रहेगा कि क्या आदिवासी और कमजोर तबके के लोग पुलिस से यह उम्मीद कर सकती है कि वो उसे इंसाफ़ दिला सकती है?

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