शहडोल में आदिवासियों के लिए अस्पताल तो छोड़िए एंबुलेंस तक पहुँचना मुश्किल है

इन इलाक़ों में जमीन पर काम कर रहा स्वास्थ्य अमला आमतौर पर गायब ही रहता है. सियाबती की मौत का यह मामला पहला और शायद आख़री भी नहीं है. बीते दिनों खाट में अस्पताल ले जाने की जो खबर बेम्हौरी से सामने आई थी वह तुम्मीवर से मात्र दो किमी की दूरी पर है.

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मध्य प्रेदश के शहडोल के एक आदिवासी गाँव में महिला को समय पर इलाज ना मिल पाने से मौत हो गई. यह घटना शहडोल और अनूपपुर की सीमा में जैतहरी जनपद के गाँव तुम्मीवर  की है. इस गाँव में बैगा आदिवासी बसते हैं.

इस गाँव में सियाबती बैगा (37 वर्ष) बीते एक महीने से बीमार थी. उनके शरीर में सूजन आदि की शिकायत चल रही थी. बीते मंगलवार की शाम तकलीफ बढ़ी तो परिजनों ने एंबुलेंस बुलाई.

एंबुलेंस को गांव तक पहुंचने में एक घंटा से ज्यादा का वक्त लग गया. मुश्किल ये भी थी कि मुख्य सड़क से गाँव तक का रास्ता ऐसा है कि उस पर गाड़ी चल ही नहीं सकती है.

सियाबती बैगा का पति सियालाल बैगा और ननद को दो किलोमीटर तक बीमार सियाबती को गोद में उठा के मुख्य सड़क तक ले जाना था. लेकिन आधे रास्ते में ही सियाबती ने दम तोड़ दिया.

सियाबती के पति सियालाल ने स्थानीय मीडिया को बताया कि सियाबती का इलाज चल रहा था. मंगलवार को सुबह ही उसे मोटरसाइकिल से डाक्टर के पास ले गए थे.

लेकिन शाम को अचानक से उसकी तबियत बिगड़ गई. लेकिन अफ़सोस की उसे समय से अस्पताल तक नहीं पहुँचाया जा सका.  

गाँवों तक सड़क नहीं है तो एंबुलेंस कैसे पहुँचे

उन्होंने कहा कि मुख्य सड़क तक पहुंचते-पहुंचते मेरे गोद में ही उसकी मृत्यु हो गई, यदि समय से एंबुलेंस पहुंच जाता और मेरे घर तक एंबुलेंस आदि पहुंचने के लिए सड़क होती तो शायद सियाबती जिंदा होती. 

सियावती अपने पीछे दो लड़कियां (14-14 वर्ष) और एक आठ महीने के लड़के को रोते-बिलखते छोड़ गई. 

सियाबती की मौत के कारणों का तो पता ही नहीं चल सका. अगर वो अस्पताल तक पहुँच जाती तो शायद बच जातीं. अगर सियाबती बच नहीं पाती तो कम से कम उनकी मौत के कारण या बीमारी के बारे में कुछ पता चलता.

बैगा आदिवासी पीवीटीजी यानि विशेष रूप से पिछड़े आदिवासी समुदाय हैं. तुम्मीवर गाँव में 98 प्रतिशत आबादी बैगा आदिवासियों की है. गांव के आदिवासी ज्यादा शिक्षित और जागरूक नहीं हैं.

कई स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि गांव में पेयजल और घरेलू उपयोग वाले दोनो तरह का पानी साफ़ नहीं है. यह भी पता चला है कि साफ़ पीने के पानी के अभाव में ग्रामीण अक्सर किसी न किसी बीमारी की चपेट में आते रहते हैं.

इन इलाक़ों में जमीन पर काम कर रहा स्वास्थ्य अमला आमतौर पर गायब ही रहता है.  सियाबती की मौत का यह मामला पहला और शायद आख़री भी नहीं है. बीते दिनों खाट में अस्पताल ले जाने की जो खबर बेम्हौरी से सामने आई थी वह तुम्मीवर से मात्र दो किमी की दूरी पर है.

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