आंध्र प्रदेश: आदिवासियों की आय बढ़ाने के लिए ट्राइबल फ़ूड पार्क की होगी स्थापना

केंद्र सरकार द्वारा फ़ंड की जा रही इस योजना को इंटिग्रेटेड ट्राइबल डेवलपमेंट एजेंसी (ITDA) के माध्यम से लागू किया जाएगा. इसका मक़सद आदिवासियों की आय, और एजेंसी क्षेत्रों में रोज़गार के मौक़े बढ़ाना है.

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आंध्र प्रदेश के ट्राइबल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फ़ेडरेशन की ट्राइफूड परियोजनाओं के तहत इस साल एक आदिवासी फ़ूड पार्क बनाया जाएगा. शुरु में पूर्वी गोदावरी ज़िले के राम्पाचोडावरम में काजू का एक प्रोसेसिंग यूनिट और विशाखापत्तनम के नरसीपट्टनम में एक कॉफी क्यूरिंग सेंटर की स्थापना होगी.

गिरिजन को-ऑपरेटिव कॉर्पोरेशन (GCC) ने नोडल निकाय के लिए प्रस्ताव पेश किए हैं, और इसके लिए ज़मीन की पहचान भी कर ली गई है.

केंद्र सरकार द्वारा फ़ंड की जा रही इस योजना को इंटिग्रेटेड ट्राइबल डेवलपमेंट एजेंसी (ITDA) के माध्यम से लागू किया जाएगा. इसका मक़सद आदिवासियों की आय, और एजेंसी क्षेत्रों में रोज़गार के मौक़े बढ़ाना है.

फ़ूड पार्क के लिए लगभग पांच एकड़ ज़मीन की ज़रूरत होगी, और इस परियोजना पर 5 से 10 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह सैकड़ों आदिवासियों के लिए रोज़गार पैदा करेगा, और उम्मीद है कि पार्क 2022 तक पूरा हो सकेगा.

इस फ़ूड पार्क के अलावा राज्य के आठ ज़िलों में 263 वन धन विकास केंद्र भी बनाए जा रहे हैं. वन धन योजना आदिवासी उत्पादक कंपनियों को मज़बूत करने के लिए बाजार से जुड़ा एक कार्यक्रम है.

माइनर फ़ॉरेस्ट प्रोड्यूस (MFP) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के इरादे से यह योजना कुछ साल पहले जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने शुरू की थी. इसका मक़सद था कि एमएफ़पी इकट्ठा करने वालों को उचित मूल्य प्रदान किया जा सके, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो और एमएफपी की सस्टेनेबल हार्वेस्टिंग (Sustainable Harvesting) सुनिश्चित की जा सके.

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