सपनो की उड़ान भरकर अमेरिका से झारखंड लौटीं आदिवासी महिला हॉकी खिलाड़ी

इन पांचों का दो साल पहले 2020 में इस कार्यक्रम के लिए चयन हुआ था लेकिन अचानक फैली कोविड महामारी के चलते वे अमेरिका नहीं जा सकी थीं. इन्हें ईस्ट इंडिया महिला हॉकी और लीडरशिप कैंप के दूसरे संस्करण में 100 महिला हॉकी खिलाड़ियों में से चुना गया था, जो 1 फरवरी, 2020 को समाप्त हुआ था.

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सिमडेगा, खूंटी और गुमला ज़िलों के दूर-दराज के गांवों से ताल्लुक रखने वाली पांच महिला हॉकी खिलाड़ियों के पास तीन हफ्ते की अमेरिकी यात्रा से लौटने के बाद जीवन जीने का नया दृष्टिकोण मिला है.

उन्हें अमेरिकी सरकार द्वारा खेल और कल्चरल एक्सजेंच प्रोग्राम के लिए चुना गया था. यह कार्यक्रम 24 जून से 13 जुलाई तक अमेरिका के मिडलबरी कॉलेज में आयोजित किया गया था.

गुमला से प्रियंका कुमारी, सिमडेगा से हेनरिटा टोप्पो और पूर्णिमा नेती, खूंटी से पुंडी सारू और जूही कुमारी पांच खिलाड़ी हैं जिन्हें मिडलबरी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम के के लिए चुना गया था. उन्हें कई लीडरशीप स्किल के साथ हॉकी ट्रेनिंग भी दी गई.

इन पांचों का दो साल पहले 2020 में इस कार्यक्रम के लिए चयन हुआ था लेकिन अचानक फैली कोविड महामारी के चलते वे अमेरिका नहीं जा सकी थीं. इन्हें ईस्ट इंडिया महिला हॉकी और लीडरशिप कैंप के दूसरे संस्करण में 100 महिला हॉकी खिलाड़ियों में से चुना गया था, जो 1 फरवरी, 2020 को समाप्त हुआ था.

यह झारखंड की युवा लड़कियों और महिलाओं के बीच सशक्तिकरण, युवा नेतृत्व और विकास को बढ़ावा देने के लिए 2018 में शुरू की गई ईस्ट इंडिया हॉकी प्रोजेक्ट का एक हिस्सा था. इस प्रोजेक्ट को अमेरिकी काउंसुलेट (कोलकाता) द्वारा एनजीओ शक्तिवाहिनी और झारखंड हॉकी महासंघ के समर्थन से शुरू किया गया था.

बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक महिला ट्रैफिकिंग के ख़िलाफ़ काम करने वाली संस्था शक्तिवाहिनी ने साल 2019-20 में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से संपर्क कर आदिवासी लड़कियों के प्रोत्साहन की योजना बनाई थी.

तब अमेरिकी काउंसुलेट (कोलकाता) के कुछ पदाधिकारी रांची आए और यहां महिला हॉकी खिलाड़ियों का शिविर आयोजित कराया. इसके बाद झारखंड की पांच लड़कियों को अमेरिका ले जाकर प्रशिक्षित कराने का निर्णय लिया गया.

खिलाड़ियों ने शेयर किया कि यह पहली बार था जब उन्होंने एक हवाई जहाज देखा साथ ही वाशिंगटन और न्यूयॉर्क जैसी जगहों पर जाने का दुर्लभ अवसर मिला.

पूर्णिमा ने कहा, “मैंने खेल और इसके कौशल के बारे में बहुत कुछ सीखा. हमें राष्ट्रीय टीम के साथ खेलने का भी मौका मिला जिससे हमें नई रणनीति और तकनीक विकसित करने में मदद मिली जो हमारे भविष्य के मैचों में फायदेमंद होगी.”

(Image Credit: Times Of India)

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