असम के कोकराझार जिले में मंगलवार को भीड़ की हिंसा के बाद कथित तौर पर बोडो और आदिवासी समुदाय के बीच झड़पें हुईं, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई. इसके बाद आरएएफ को तैनात किया गया और इंटरनेट/मोबाइल डेटा सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गईं.
हालांकि, जिला मजिस्ट्रेट ने बुधवार को बताया कि हिंसा प्रभावित कोकराझार में धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं और पिछले 24 घंटों में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है.
चार आर्मी कॉलम अर्धसैनिक बलों के साथ संवेदनशील जगहों पर तैनात हैं और भारतीय सेना फ्लैग मार्च कर रही है.
साथ ही राज्य के दो मंत्रियों की मौजूदगी में बुधवार को शांति बैठक आयोजित की गई.
रक्षा प्रवक्ता ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि जिले के संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात सेना ने विश्वास कायम करने के उपायों के तहत फ्लैग मार्च किया.
उन्होंने बताया कि मंगलवार रात को सेना के जवानों ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर करीगांव और उसके आसपास के प्रभावित इलाकों में गश्त की. फिलहाल जिले में सेना की चार टुकड़ियां तैनात हैं.
अधिकारियों ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है और कोकराझार तथा पड़ोसी जिले चिरांग में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है.
अधिकारियों ने कहा है कि जिले में लगातार दूसरे दिन भी भीड़ इकट्ठा करने, रैलियों, धरना-प्रदर्शन, नारे लगाने और धारदार हथियार ले जाने पर रोक के आदेश और मोबाइल इंटरनेट सेवाओं का निलंबन लागू रहेगा.
जिला मजिस्ट्रेट पंकज चक्रवर्ती ने कहा, “पिछले 24 घंटों में कोई घटना नहीं होने से धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं. संवेदनशील जगहों पर पुलिस कर्मियों के साथ सेना और अर्धसैनिक बलों की तैनाती जारी है.”
अब ज़िले में स्थिति सामान्य है – IGP
इस बीच, IGP (लॉ एंड ऑर्डर) अखिलेश कुमार सिंह ने कहा कि जो कुछ हुआ वह पुरानी बात है और जिले में कोई नई घटना नहीं हुई है.
उन्होंने बताया कि सेना के अलावा त्वरित प्रतिक्रिया बल (आरएएफ), सीआरपीएफ और असम पुलिस के सुरक्षाकर्मी भी प्रभावित क्षेत्रों में गश्त कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि अलग-अलग स्कूलों में पांच राहत शिविर स्थापित किए गए हैं और आसपास के गांवों से 1,200 से अधिक लोगों ने वहां शरण ली है लेकिन ‘हम उन्हें सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा रखने और अपने घरों में लौटने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं.’
जब उनसे पूछा गया कि क्या इस घटना का किसी आतंकवादी संगठन से कोई संबंध है, तो सिंह ने कहा, ‘मामले की जांच की जाएगी लेकिन फिलहाल ऐसा कोई सबूत नहीं है.’
उन्होंने कहा कि यह घटना एक दुर्घटना के कारण हुई और इससे दोनों समुदायों के बीच अविश्वास पैदा हुआ, लेकिन अब जिले में स्थिति सामान्य हो रही है.
उन्होंने कहा, “देश विरोधी तत्व हमेशा सांप्रदायिक झड़पें भड़काने के लिए मौके की तलाश में रहते हैं. किसी को भी उनके एजेंडे का शिकार नहीं होना चाहिए. इसलिए मोबाइल इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई ताकि वे इसका फायदा न उठा सकें.”
शांति बैठक आयोजित
कैबिनेट मंत्री जयंत मल्लाबरुआ और चरण बोरो ने बुधवार को कोकराझार में बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल के प्रमुख हाग्रामा मोहिलारी और ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन सहित विभिन्न संगठनों के नेताओं के साथ बैठक की.
मीटिंग के बाद एक ब्रीफिंग में मंत्री जयंत मल्लाबरुआ ने कहा, “गलतफहमी की वजह से कोकराझार में कुछ अनचाही घटनाएं हुईं. इससे हम सभी को दुख हुआ है. यह बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन के विकास और प्रगति का समय है. सीएम हिमंत बिस्वा सरमा, जो अभी दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की मीटिंग में हिस्सा ले रहे हैं, लगातार विकास पर नज़र रख रहे हैं. डीजीपी लगातार स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं.”
उन्होंने कहा कि मंगलवार से कुछ लोग पांच रिलीफ कैंप में शरण लिए हुए हैं और बुधवार को हुई मीटिंग में लोगों को रिलीफ कैंप से उनके घर भेजने के बारे में चर्चा हुई.
उन्होंने आगे कहा कि वह शुक्रवार को फिर से जिले का दौरा करेंगे ताकि मृतकों के परिवारों और घायल लोगों से मिल सकें.
हिंसा में बोडो समुदाय के दो लोगों की मौत हो गई. जबकि बोडो और आदिवासी दोनों समुदायों के चार अन्य लोग घायल हो गए. यह हिंसा दोनों समुदायों की भीड़ से जुड़ी एक कार दुर्घटना के बाद भड़की थी.
हिंसा की शुरुआत
गृह विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सोमवार रात करीगांव चौकी के अंतर्गत मानसिंह रोड पर तीन बोडो लोगों को ले जा रही एक गाड़ी से दो आदिवासी व्यक्तियों को टक्कर लग गई.
इसके बाद आदिवासी ग्रामीणों ने तीनों बोडो लोगों के साथ मारपीट की और वाहन को आग लगा दी. इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि एक अन्य व्यक्ति ने मंगलवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. उन्होंने कहा कि तीन अन्य घायलों का अस्पताल में इलाज हो रहा है.
उन्होंने बताया कि मंगलवार को स्थिति तब और बिगड़ गई जब बोडो और आदिवासी दोनों समुदायों ने करीगांव चौकी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया, टायर जलाए, एक सरकारी कार्यालय में आग लगा दी और करीगांव पुलिस चौकी पर हमला कर दिया.
पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे, जिसमें कुछ पुलिसकर्मियों सहित कई लोग घायल हो गए.
इस बीच हमलों के डर से करीगांव के कई ग्रामीणों के घर छोड़कर जाने के बाद कोकराझार जिला प्रशासन ने करीगांव हाई स्कूल और ग्वाजनपुरी अमनपारा हाई स्कूल में दो राहत शिविर स्थापित किए हैं.

