झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को चुनावी राज्य असम में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार पर हमला बोला और उस पर अपनी बांटो और राज करो की नीति से आदिवासियों का शोषण करने का आरोप लगाया.
इसके एक दिन बाद सोमवार को फिर से मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्य में आदिवासियों का शोषण हो रहा है और बीजेपी सरकार के तहत उनके खिलाफ अत्याचार बढ़े हैं.
JMM अध्यक्ष सोरेन ने सोमवार शाम को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक तीखे बयान से असम के आदिवासी समुदाय को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज़ कर दी है.
उनके बयान में औपनिवेशिक काल के शोषण, अधिकारों से लगातार इनकार और सामूहिक विरोध के आह्वान को जोड़ा गया है, जो चाय बागान वाले इलाके के दिल पर चोट करता है
उन्होंने कहा कि अगर वहां की स्थानीय सरकार आदिवासियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को रोकने में नाकाम रहती है, तो झारखंड से आदिवासियों की एक बड़ी सेना अपने भाइयों और बहनों की मदद के लिए असम जाएगी.
सोरेन ने ये बयान पश्चिम सिंहभूम जिले के टोंटो ब्लॉक के सेरंगसिया में 1837 के कोल विद्रोह के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद दिए.
सोरेन यह भी दावा किया कि स्थानीय लोगों के खिलाफ हिंसा इस हद तक है कि हाल के महीनों में गैर-आदिवासी समूहों ने 25 गांवों में आग लगा दी और संपत्ति लूट ली.
हेमंत सोरेन ने कहा, “मैं कुछ दिन पहले असम में था. मुंडा, हो, संथाल और अन्य स्थानीय आदिवासी समूहों ने मुझसे मिलकर आदिवासी समूहों के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों के बारे में बताया. मैंने उन्हें आश्वासन दिया है कि अगर इसे रोका नहीं गया, तो जल्द ही बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के सदस्यों की जान बचाने के लिए झारखंड से असम आएं.”
हेमंत ने कहा कि उनके पिता और आदिवासी नेता शिबू सोरेन स्थानीय जनजातियों के हक के लिए लड़ने के लिए कई बार असम गए थे, जब भी उनके खिलाफ हिंसा होती थी.
दिसंबर और जनवरी के बीच कोकराझार और पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिलों में हुई हिंसक घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये घटनाएं कथित तौर पर ज़मीन के मालिकाना हक, स्वदेशी समूहों में डेमोग्राफिक बदलावों का डर, छठी अनुसूची क्षेत्रों से बाहरी लोगों को निकालने की मांग आदि को लेकर हुई थीं.
हेमंत सोरेन यह भी कहा कि झारखंड के जो स्वदेशी लोग तमिलनाडु, कर्नाटक और कई अन्य राज्यों में बस गए हैं, उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आबादी के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय की ‘स्वदेशी पहचान’ का उल्लंघन है.
सीएम सोरेन ने कहा, “आदिवासी भारत के मूल निवासी हैं और उन्हें इस बात की परवाह किए बिना कि वे कहां बसे हैं, अनुसूचित जनजाति के रूप में माना जाना चाहिए.”
उन्होंने आगे कहा, “राज्य सरकार आदिवासी समुदाय को सशक्त बनाने के लिए कई मोर्चों पर काम कर रही है और शिक्षित आदिवासी युवाओं को नौकरी देना उनमें से एक है.”
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री मैया सम्मान योजना राज्य की योग्य महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए समर्पित है. पश्चिम सिंहभूम में 2 लाख महिला लाभार्थी मैया सम्मान योजना के तहत हर महीने 2500 रुपये का लाभ उठा रही हैं.”
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 400 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी किया, 3.77 लाख लाभार्थियों के बीच 637 करोड़ रुपये की संपत्ति वितरित की और 1,449 युवाओं को नौकरी के पत्र सौंपे.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, तिनसुकिया में रविवार को बड़ी संख्या में आदिवासियों को संबोधित करते हुए हेमंत ने कहा, “असम में अभी जो लोग सत्ता में हैं, उन्होंने अपनी नापाक नीतियों से लोगों को बांट दिया है. अब जब चुनाव आ रहे हैं, तो आप सभी को एकजुट रहना चाहिए.”
उन्होंने वादा किया, “अब मैं भी आप सभी के साथ संपर्क में रहूंगा, आपके कल्याण के लिए काम करूंगा.”
असम की मौजूदा सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने उन्हें “बिजनेसमैन” कहा.
उन्होंने कहा, “वे राजनेता नहीं बल्कि बिजनेसमैन हैं. वे सिर्फ लेना जानते हैं, आपको कुछ देना नहीं जानते. लेकिन ध्यान रखें, हम (आदिवासी) आत्म-सम्मान और गरिमा के साथ जीते हैं. लेकिन अगर समय आया, तो हम किसी का भी सामना कर सकते हैं. इसीलिए आदिवासियों ने ही सबसे पहले अंग्रेजों के खिलाफ आवाज़ उठाई थी.”
हेमंत सोरेन ने पूर्वोत्तर राज्य में विधानसभा चुनाव नज़दीक आने पर चाय बागान में काम करने वाले आदिवासियों सहित बड़ी संख्या में आदिवासियों को सतर्क और एकजुट रहने की चेतावनी दी.
तिनसुकिया में ऑल आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ़ असम (AASAA) द्वारा आयोजित आदिवासी महासभा में भाग लेने के लिए हेमंत का असम दौरा, एक विशेष निमंत्रण के बाद, कई मायनों में महत्वपूर्ण है, खासकर 2024 के झारखंड विधानसभा चुनावों में शानदार जीत के बाद.
उनकी पार्टी – झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) – अब पूर्वोत्तर में भी चुनाव लड़ने पर विचार कर रही है.
गौरतलब है कि 2024 के झारखंड विधानसभा चुनावों में, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा बीजेपी के प्रमुख रणनीतिकारों में से एक थे, जो JMM के नेतृत्व वाले गठबंधन का मुकाबला करने के लिए महीनों तक झारखंड में डेरा डाले हुए थे.
हालांकि, हिमंत की देखरेख में बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA को भारी हार का सामना करना पड़ा.
(Photo credit: @HemantSorenJMM)

