HomeAdivasi Dailyलद्दाख का पश्मीना : लोगों की रोज़ी-रोटी के लिए प्रतिद्वंद्विता नहीं सहयोग चाहिए

लद्दाख का पश्मीना : लोगों की रोज़ी-रोटी के लिए प्रतिद्वंद्विता नहीं सहयोग चाहिए

ऐसा लगता है कि लद्दाख पश्मीना का GI टैग अधिकारियों की वर्चस्व की लड़ाई में उलझ गया है. जब ऐसा होता है तो उत्पादकों या कारीगरों का हित कई बार पीछे छूट जाता है.

लद्दाख पश्मीना वस्त्रों (Pashmina textiles) को जीआई टैग (Geographical Indication-GI) मिलना एक बड़ी उपलब्धि थी. लेकिन यह उपलब्धि किसकी पहल और मेहनत से हासिल हुई है, इस पर विवाद हो गया है.  

इस विवाद के बीच ‘लूम्स ऑफ लद्दाख वुमेन कोऑपरेटिव लिमिटेड’ (Looms of Ladakh Women Cooperative Limited) ने पारदर्शिता, स्वतंत्र आकलन और क्षेत्र के सभी हितधारकों के बीच सहयोग की अपील की है.

इस सिलसिले में 15 अक्टूबर को जारी एक प्रेस वक्तव्य में कहा गया है कि लद्दाख पश्मीना टेक्सटाइल्स की श्रेणी 24 और 25 के लिए GI आवेदन की प्रक्रिया कपड़ा मंत्रालय और ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन की पहल के तहत आगे बढ़ाई गई. 

इस प्रयास में लूम्स ऑफ लद्दाख वुमेन कोऑपरेटिव लिमिटेड के मुताबिक, उसने हलफनामों और तकनीकी दस्तावेजों (affidavits and technical documents) के माध्यम से दोनों श्रेणियों में लद्दाख में वस्त्र निर्माण की अपनी क्षमता प्रदर्शित की है.

सहकारी संस्था ने इसे लद्दाख के कपड़ा उद्योग के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया. हालांकि, उसका कहना है कि इसके बाद हुई सार्वजनिक चर्चा और मीडिया कवरेज से यह उपलब्धि योगदान और श्रेय को लेकर विवाद में बदल गई है.

इस बयान में कहा गया है कि GI टैग पर बहस की बजाए इस बात पर ज़ोर दिया जाना चाहिए कि कैसे निर्माण क्षमता बढ़ाई जाए. इसके अलावा इस काम से जुड़ी महिलाओं की आजीविका और लद्दाख पश्मीना के भविष्य को मजबूत बनाने पर बात होनी चाहिए.

लूम्स ऑफ लद्दाख वुमेन कोऑपरेटिव लिमिटेड ने दावा किया है कि वर्ष 2024 तक कारीगरों की औसत मासिक आय 3,000 रुपये थी जो बढ़कर करीब 15,000 रुपये हो गई है. 

लूम्स ऑफ लद्दाख वुमेन कोऑपरेटिव लिमिटेड ने अपनी सह-संस्थापक अभिलाषा बहुगुणा के योगदान का भी उल्लेख किया है. इस बयान में उन्हें संस्था की निर्माण प्रक्रिया में बिना किसी वेतन या वित्तीय लाभ के पेशेवर सेवाएं देने वाली रणनीतिक सलाहकार बताया गया है.

इस बयान में कहा गया है कि अभिलाषा बहुगुणा ने संस्थागत विकास, लेखा प्रणाली स्थापित करने, कारीगरों के कौशल विकास, साझेदारियां बनाने, धन जुटाने और विनिर्माण क्षमता मजबूत करने में योगदान दिया है. 

इस बयान में यह भी कहा गया है कि उन्होंने अपने निजी संसाधनों का निवेश किया. 

इस संस्था ने कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक बिना वेतन या पैसे लिए संस्था को मजबूत बनाने कि लिए काम किया उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश निंदनीय है. 

सहकारी संस्था ने कहा कि संस्थागत कामकाज की जांच, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाना उचित है, लेकिन ऐसी प्रक्रियाएं निष्पक्षता और सम्मान के साथ होनी चाहिए।

लूम्स ऑफ लद्दाख वुमेन कोऑपरेटिव लिमिटेड से जुड़े विवाद में अभिलाषा बहुगुणा और उनके पति प्रसन्ना रामास्वामी पर कुछ आरोप लगाए गए हैं. 

प्रसन्ना रामास्वामी एक IAS अधिकारी हैं. प्रसन्ना रामास्वामी 2015 से 2017 के दौरान लेह के डिप्टी कमिश्नर और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार थे. लूम्स ऑफ लद्दाख का पंजीकरण वर्ष 2017 में हुआ था.

प्रशासन के अनुसार, संस्था के रिकॉर्ड में रामास्वामी और उनकी पत्नी अभिलाषा बहुगुणा के नाम सह-संस्थापक सदस्यों के रूप में दर्ज हैं. 

इस सिलसिले में प्रशासन ने सवाल उठाया है कि क्या इस भूमिका के लिए आवश्यक सरकारी अनुमति ली गई थी. इसी आधार पर अधिकारी की प्रशासनिक भूमिका और संस्था से उनके संबंधों में संभावित हितों के टकराव का मुद्दा उठाया गया.

इस आरोप को भी लूम्स ऑफ लद्दाख वुमेन कोऑपरेटिव लिमिटेड पहले ही ख़ारिज कर चुका है. संस्था का कहना है कि रामास्वामी ने उसकी स्थापना के समय केवल स्वैच्छिक मार्गदर्शन दिया था. 

संस्था के मुताबिक प्रसन्ना रामास्वामी ने कोई निर्वाचित पद नहीं संभाला और पंजीकरण के बाद उसके कामकाज से खुद को अलग कर लिया था.

हाल ही में लेह के डिप्टी कमिश्नर रोमिल सिंह को लूम्स ऑफ लद्दाख वुमेन कोऑपरेटिव लिमिटेड का चेयरमैन नियुक्त किया गया है. 

लूम्स ऑफ लद्दाख वुमेन कोऑपरेटिव लिमिटेड  की तरफ से जारी बयान में सहकारी संस्था की आम सभा ने विशेष प्रस्ताव पारित कर संस्था के नियमावली (आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन) में संशोधन करने का निर्णय लिया है. 

इसके तहत संस्था के अध्यक्ष का चुनाव लद्दाखी महिला उत्पादक सदस्यों में से ही किया जाएगा. यह प्रस्ताव अनुमोदन के लिए उप-पंजीयक (डिप्टी रजिस्ट्रार) को सौंप दिया गया है.

लूम्स ऑफ लद्दाख का कहना है कि इसे निजी व्यावसायिक उद्यम के बजाय महिला उत्पादकों के स्वामित्व वाली सहकारी संस्था के रूप में विकसित किया गया. इसका उद्देश्य पश्मीना पशुपालकों और कारीगरों को उत्पादन, बाजार और आर्थिक लाभ के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है.

संस्था के अनुसार, पिछले वर्षों में उसने उत्पादन केंद्र, मशीनरी, तकनीकी कौशल और स्थानीय विनिर्माण की क्षमता विकसित करने पर काम किया है. उसने कहा कि उसके काम का आकलन केवल अनुदान की राशि या खर्च के आधार पर नहीं, बल्कि जमीन पर बनी आधारभूत संरचना, विकसित कौशल और उत्पादकों को मिले लाभ के आधार पर भी किया जाना चाहिए.

लूम्स ऑफ लद्दाख वुमेन कोऑपरेटिव लिमिटेड ने पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि रिकॉर्ड की जांच और संस्थागत प्रक्रियाओं से जुड़े सवालों का समाधान निष्पक्ष तरीके से किया जाना चाहिए.

लद्दाख के पश्मीना उद्योग की बुनियाद चांगपा जनजाति के पशुपालकों के श्रम पर टिकी है, जबकि स्थानीय महिला कारीगर और बुनकर इस रेशे को मूल्यवान वस्त्रों में बदलने में अहम भूमिका निभाते हैं।”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments