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कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों का आरोप, खनन का विरोध कर रहे ओडिशा के आदिवासियों पर ‘झूठे’ मामले दर्ज

ग्रामीणों का कहना है कि अगर हम खनन की अनुमति देते हैं, तो इन पहाड़ियों से निकलने वाली करीब 200 नदियां सूख जाएंगी. लेकिन अगर हम इसका विरोध करते हैं तो वे हमें माओवादी करार देते हैं. हम अपनी पहाड़ियों को नष्ट होते देखने के बजाय मरना पसंद करेंगे.

ओडिशा के 23 वर्षीय आदिवासी युवक कृष्णा सिक्का, जिसने बलात्कार के आरोप में पांच महीने जेल में बिताए थे… उन्होंने आरोप लगाया है कि कालाहांडी और रायगढ़ जिलों में खनन का विरोध करने के कारण उन्हें दंडित करने के लिए यह मामला गढ़ा गया था.

कृष्णा ने शनिवार को भुवनेश्वर में मीडिया से बात करते हुए कहा, “मुझ पर 4 अक्टूबर, 2023 को मामला दर्ज किया गया और 12 फ़रवरी, 2024 को रिहा किया गया. खनन का विरोध करने पर यही होता है. उत्पीड़न का कोई अंत नहीं है.”

कृष्णा समेत बॉक्साइट भंडारों से समृद्ध सिजीमाली, कुत्रुमाली और माजिंगमाली क्षेत्रों के ग्रामीणों ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओडिशा यात्रा के दौरान उनसे मुलाकात की.

उन्होंने बताया कि कैसे खनन का विरोध करने वालों को धमकाया जा रहा है, अपराधी बनाया जा रहा है और उन पर माओवादी होने का झूठा ठप्पा लगाया जा रहा है.

24 वर्षीय मामी पुशिका ने कहा, “अगर हम खनन की अनुमति देते हैं, तो इन पहाड़ियों से निकलने वाली करीब 200 नदियां सूख जाएंगी. लेकिन अगर हम इसका विरोध करते हैं तो वे हमें माओवादी करार देते हैं. हम अपनी पहाड़ियों को नष्ट होते देखने के बजाय मरना पसंद करेंगे.”

एक अन्य आदिवासी महिला ने कहा, “हमने बार-बार विरोध किया है लेकिन किसी सरकार ने हमारी बात नहीं सुनी. इस बार राहुल गांधी ने हमारी बात ध्यान से सुनी और समर्थन का वादा किया.”

नियमगिरि खनन विरोधी आंदोलन में अपनी भूमिका के लिए जाने जाने वाले कार्यकर्ता लिंगराज आज़ाद ने याद किया कि कैसे 2010 में गांधी की यात्रा ने नियमगिरि को बचाने में मदद की थी.

उन्होंने पहाड़ों के सिपाही बनने का वादा किया था और उन्होंने अपना वादा निभाया. अब हमने उन्हें सिजिमाली और कुत्रुमाली आने का न्योता दिया है और उन्होंने हामी भर दी है.

आज़ाद ने आरोप लगाया कि खनन का विरोध करने वालों को अक्सर झूठे मामलों में फंसाया जाता है. जिनमें बलात्कार, हत्या के प्रयास और यहां तक कि यूएपीए के तहत भी मुक़दमे दर्ज किए जाते हैं. “अब वे सिजीमाली जैसे नए इलाकों को निशाना बना रहे हैं. वे हमारे प्रतिरोध को दबाना चाहते हैं.”

प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार पर कॉर्पोरेट हितों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, “सरकार-अडानी-वेदांता गठजोड़ तीन लाख से ज़्यादा आदिवासियों के जीवन और आजीविका के लिए ख़तरा है.”

उन्होंने आगे कहा कि वन अधिकार अधिनियम और पेसा अधिनियम को दरकिनार करके और ग्राम सभाओं की सहमति के बिना खनन को बढ़ावा दिया जा रहा है.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि “कॉर्पोरेट गुंडों” और पुलिस ने डर का माहौल पैदा कर दिया है और खनन कंपनियों के पक्ष में रिपोर्टों में हेरफेर किया जा रहा है.

सिजिमाली बॉक्साइट खनन ब्लॉक वेदांता लिमिटेड को पहले ही आवंटित किया जा चुका है. रायगढ़ और कालाहांडी में कुत्रुमाली ब्लॉक, साथ ही कोरापुट में बल्लाडा ब्लॉक, अडानी एंटरप्राइजेज की सहायक कंपनी मुंद्रा एल्युमीनियम लिमिटेड को आवंटित किए गए हैं.

दोनों कंपनियों ने कथित तौर पर खदानों के संचालन के लिए माइथ्री इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड माइनिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को नियुक्त किया है.

ऐसे में राहुल गांधी को दिए ज्ञापन में ग्रामीणों ने उनसे अपनी चिंताओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, “हम अडानी, वेदांता या अंबानी को अपनी ज़मीन और संस्कृति को नष्ट नहीं करने देंगे. हम संविधान के तहत सुरक्षा चाहते हैं.”

वहीं हाल ही में जिंदल स्टील ने क्योंझर जिले में स्थित रोइडा-I लौह अयस्क एवं मैंगनीज ब्लॉक के लिए 50 साल का खनन पट्टा हासिल किया है.      

जिंदल स्टील ने बयान में कहा, “कंपनी ने उक्त खनन पट्टे के अनुदान के लिए ओडिशा सरकार से आशय पत्र (एलओआई) हासिल कर लिया है.”

रोइडा-I लौह अयस्क और मैंगनीज ब्लॉक की पर्यावरणीय मंजूरी क्षमता 30 लाख टन प्रति वर्ष है और इसमें 12.605 करोड़ टन खनिज भंडार है.

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