कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार (1 अक्टूबर, 2016) को मध्य प्रदेश के बालाघाट ज़िले के जगला गाँव का दौरा किया. उन्होंने उन आदिवासी बच्चों के परिवारों से मुलाक़ात की, जिनकी हाल के महीनों में संदिग्ध संक्रामक बीमारियों और कुपोषण के कारण मौत हो गई है.
उन्होंने प्रभावित परिवारों की समस्याएं सुनीं और इस मुद्दे को संसद में उठाने का आश्वासन दिया.
बालाघाट में पिछले तीन महीनों में मॉनसून से जुड़ी बीमारियों, कमज़ोर इम्यूनिटी और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच न होने के कारण 30 से ज़्यादा आदिवासी बच्चों की मौत हो चुकी है.
राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश सरकार पर आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था नहीं करने का आरोप लगाया.
राहुल गांधी के पहुंचने पर बड़ी संख्या में ग्रामीण उन्हें देखने के लिए जुटे. स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचे थे.
राहुल गांधी ने बच्चों को गोद में उठाया, उनसे दुलार किया और ग्रामीणों से मुस्कुराकर बातचीत की. इस दौरान उन्होंने महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की बातें सुनीं.
ऐसा लग रहा है जैसे सरकार यहां है ही नहीं
ग्रामीणों से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे देश के बीचोंबीच इन लोगों को छोड़ दिया गया है और यहां केंद्र या मध्य प्रदेश सरकार है ही नहीं.
उन्होंने कहा, “सरकार को जो स्वास्थ्य, शिक्षा और रोज़गार जैसी सुविधाएं देनी चाहिए थीं, वे यहां बंद कर दी गई हैं. ऐसा लगता है जैसे इन लोगों को भारत के बीचों-बीच छोड़ दिया गया है और भारत सरकार और मध्य प्रदेश सरकार यहाँ मौजूद ही नहीं हैं.”
उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत बीमारी और कुपोषण के कारण हुई तथा स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और आदिवासी कल्याण से जुड़ी सरकारी सहायता प्रभावित क्षेत्र में ठीक से नहीं पहुंच रही है.
राहुल गांधी ने कहा, “यह मध्य प्रदेश में सरकार की पूरी तरह से नाकामी है. पूरी तरह से 100 प्रतिशत सरकारी नाकामी. मैं संसद में यह मुद्दा उठाऊंगा…सिर्फ़ उनका मुद्दा ही नहीं, बल्कि देश भर में आदिवासियों के लिए क्या किया जा रहा है, यह भी.”
राहुल ने कहा कि सरकार इस इलाके के लोगों को ज़मीन के रजिस्ट्रेशन, वन अधिकारों या मनरेगा (MGNREGA) के मामले में कोई मदद नहीं दे रही है. मनरेगा, ग्रामीण रोज़गार योजना थी, जिसकी जगह अब ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोज़गार और आजीविका मिशन ग्रामीण’ (VB-G RAM G) ने ले ली है.
दो हफ़्तों में राज्य के अपने दूसरे दौरे पर आए कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि जिन परिवारों ने अपने बच्चे खो दिए, उनमें से आधे परिवारों को अभी तक सरकार से कोई मुआवज़ा नहीं मिला है.
अपने दौरे के दौरान, गांधी ने पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात की और स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, रोज़गार और आदिवासी कल्याण से जुड़ी उनकी चिंताएं सुनीं. उन्होंने राज्य सरकार पर स्थिति से ठीक से न निपटने का आरोप लगाया.
उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों की मौत बीमारी और कुपोषण के कारण हुई और इलाके में बुनियादी सरकारी मदद का सिस्टम ठप्प पड़ गया है.
उन्होंने कहा, “यहां कई बच्चों की मौत बीमारी और कुपोषण के कारण हुई है. सरकार को जो भी मदद देनी चाहिए, चाहे वह स्वास्थ्य सेवा हो, शिक्षा हो या रोज़गार हो वह पूरी तरह से ठप्प हो गई है.”
उन्होंने कहा, “मैं सरकार से अपनी ज़िम्मेदारी निभाने के लिए कहना चाहता हूं. कम से कम उन्हें उनकी ज़मीन के कागज़ात (पट्टा) तो दें, जो ‘वन अधिकार अधिनियम’ के तहत उनका अधिकार है. आपने मनरेगा का नाम बदल दिया, लेकिन कम से कम इसे यहां शुरू तो करें. उन्हें वे स्कूल और अस्पताल दें जिनके वे हकदार हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “पता नहीं आप किस दुनिया में हैं. आप 24 घंटे विकास की बात करते हैं, लेकिन भ्रष्टाचार 24 घंटे होता है. लेकिन जब हमारे आदिवासी भाइयों को ज़रूरत होती है, तो आप गायब हो जाते हैं.”
BJP की प्रतिक्रिया
बीजेपी ने इस दौरे को लेकर राहुल गांधी पर पलटवार किया. मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने उन पर मौतों का इस्तेमाल राजनीतिक मक़सद के लिए करने का आरोप लगाया और इस दौरे को “राजनीतिक पर्यटन” बताया.
शुक्ला ने कहा, “सरकार बनाने के लालच में, राहुल गांधी घटना के महीनों बाद बालाघाट आ रहे हैं और राजनीतिक पर्यटन कर रहे हैं.”
शुक्ला ने कहा कि घटना के बाद राज्य सरकार ने स्थिति पर कार्रवाई की थी. सीएम मोहन यादव, वे खुद और ज़िले के प्रभारी मंत्री ने इलाके का दौरा किया था. उन्होंने बताया कि चार ब्लॉक महिला विकास अधिकारी तैनात किए गए हैं और इलाके में 14 सब-हेल्थ सेंटर और कम्युनिटी हेल्थ सेंटर बनाए जा रहे हैं.
वहीं, मध्य प्रदेश BJP अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए बालाघाट में विकास की कमी के लिए कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराया.
भोपाल में खंडेलवाल ने कहा, “केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी और मुख्यमंत्री मोहन यादव जी के मार्गदर्शन में बालाघाट शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है और नक्सलवाद से मुक्त हो रहा है.”
उन्होंने आगे कहा, “राहुल गांधी को मध्य प्रदेश आकर यह भी बताना चाहिए कि किसके शासनकाल में नक्सलवाद फला-फूला? क्या उन्होंने कभी तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मंत्री लखीराम कावरे जी की नृशंस हत्या के बाद उनके परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना दी थी? बालाघाट के पिछड़ेपन के लिए कौन जिम्मेदार था? राहुल गांधी को इन सवालों के जवाब भी देने चाहिए.”
पिछले साल पड़ोसी छिंदवाड़ा में मिलावटी कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत और इस साल की शुरुआत में इंदौर में पानी में गंदगी की वजह से हुई मौतों जैसी दूसरी त्रासदियों के बारे में पूछे जाने पर राहुल ने कहा, “मध्य प्रदेश में सरकार पूरी तरह नाकाम रही है। आप जहाँ भी जाएँ, आपको यही दिखेगा. यह 100% सरकारी नाकामी है.”
हेल्थकेयर तक पहुंच नहीं
बालाघाट के बिरसा ब्लॉक में जो कभी नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित था, जुलाई से अब तक 30 से ज़्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है. इन मौतों की वजह खसरा, मलेरिया, सांस की बीमारी, कुपोषण, एनीमिया और डिहाइड्रेशन जैसी कई संक्रामक बीमारियां थीं.
राज्य सरकार ने अब तक 32 मृत बच्चों के परिवारों के लिए मुआवज़े को मंज़ूरी दी है.
हालांकि अधिकारियों ने स्थानीय लोगों के झाड़-फूंक जैसे तरीकों पर निर्भरता को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है लेकिन प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उन्हें अस्पताल तक पहुंच नहीं मिल पाती.
उनका कहना है कि दूर-दराज़ के इलाकों में उनके गाँवों तक हेल्थकेयर प्रोफेशनल नहीं आते.

