कर्नाटक के मैंगलुरु में कोरगा आदिवासी समुदाय के सदस्यों ने अपनी लंबे समय से लंबित भूमि संबंधी मांगों को लेकर अर्धनग्न विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि 33 कोरगा परिवारों को भूमि के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज (पट्टे) और आवासीय भूखंड तत्काल सौंपे जाएं.
यह मार्च वामनजूर से शुरू होकर पाडिल स्थित जिला प्रशासन के कार्यालय परिसर, प्रजा सौधा तक पहुंचा.
यह विरोध प्रदर्शन कर्नाटक आदिवासी अधिकार समन्वय समिति (Karnataka Adivasi Hakkugala Samanvaya Samiti) के नेतृत्व में आयोजित किया गया.
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, वामनजूर क्षेत्र में रहने वाले कोरगा समुदाय के 33 परिवारों को भूमि के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज और आवासीय भूखंड उपलब्ध कराने की मांग लंबे समय से की जा रही है.
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार और संबंधित अधिकारियों के सामने बार-बार अपनी मांगें रखने के बावजूद परिवारों को अब तक उनका अधिकार नहीं मिला है. उन्होंने मैंगलुरु नगर निगम और जिला प्रशासन पर इस मामले की अनदेखी करने का आरोप लगाया और तत्काल कार्रवाई की मांग की.
आज़ादी से पहले से भूमि पर रहने वाले परिवार
रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित कोरगा परिवार वामनजूर क्षेत्र में आज़ादी से पहले से रह रहे हैं.
प्रदर्शनकारियों की शिकायत है कि भूमि के दस्तावेज जारी करने की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है और प्रशासनिक देरी के कारण परिवार अपने भूमि अधिकारों को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं.
समुदाय के लिए यह केवल कागजी दस्तावेजों का मामला नहीं है बल्कि सुरक्षित आवास और भूमि पर कानूनी अधिकार प्राप्त करने का प्रश्न भी है.
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से पात्र परिवारों को बिना किसी और देरी के भूमि के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज और आवासीय भूखंड देने की अपील की.
अर्धनग्न प्रदर्शन क्यों किया गया?
प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए अर्धनग्न मार्च का रास्ता अपनाया. उनका उद्देश्य यह दिखाना था कि बार-बार ज्ञापन देने और आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है.
मार्च वामनजूर से शुरू हुआ और पाडिल स्थित प्रजा सौधा परिसर तक पहुंचा. प्रदर्शनकारियों ने पारंपरिक ढोल बजाते हुए मार्च निकाला.
इस आंदोलन में समुदाय के सदस्यों के साथ आदिवासी अधिकारों के लिए काम करने वाले अन्य लोग भी शामिल हुए.
नेताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी
कोरगा समुदाय के नेता करिया ने चेतावनी दी कि यदि जिला प्रशासन ने उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. उन्होंने आगे चलकर पूर्ण नग्न प्रदर्शन करने की संभावना भी जताई.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा के जिला सचिव मुनीर कटिपल्ला ने भी चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर जिला प्रशासन के कार्यालय का घेराव किया जा सकता है.
उन्होंने समाज में कोरगा समुदाय के साथ होने वाले व्यवहार पर सवाल उठाए और कहा कि इस वंचित समुदाय के सदस्यों को भी वही गरिमा और सम्मान मिलना चाहिए, जो समाज में अन्य लोगों को दिया जाता है.
सीआईटीयू के जिला महासचिव सुनील कुमार बजाल ने भी प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने और बिना किसी अतिरिक्त देरी के समाधान करने का आग्रह किया.
यह घटना आदिवासी समुदायों के भूमि अधिकारों, सुरक्षित आवास और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं को सामने लाती है. ऐसे में प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि पात्र परिवारों को उनके अधिकार जल्द से जल्द दिए जाएं और इस मामले को आगे टालने के बजाय तत्काल हल किया जाए.
(Image credit: Deccan Herald)

