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एक आदिवासी ज़िले के आला अधिकारी यानि कलेक्टर की ज़िंदगी कितनी मुश्किल होती है?

इस इंटरव्यू में आप एक आदिवासी ज़िले में विकास के दावों और हकीकत पर एक कलेक्टर की साफ़गोई का अहसास करेंगे

Main Bhi Bharat के संपादक श्याम सुंदर के साथ इस ख़ास बातचीत में महाराष्ट्र के नंदुरबार ज़िले की कलेक्टर डॉ. मिताली सेठी अपने सफ़र, अपने काम और देश के सबसे उपेक्षित आदिवासी इलाक़ों में से एक के साथ अपने गहरे जुड़ाव पर खुलकर बात करती हैं.

डॉ. सेठी उस समय सुर्ख़ियों में आईं जब उन्होंने अपने ही बच्चों का दाख़िला ज़िला परिषद के आंगनवाड़ी / सरकारी स्कूल में कराया. यह एक प्रतीकात्मक क़दम था, जिसका मक़सद सरकारी संस्थानों पर भरोसा मज़बूत करना और सरकारी शिक्षा को लेकर बनी धारणाओं को चुनौती देना था.

लेकिन इस इंटरव्यू में डॉ. मिताली सेठी सिर्फ़ सुर्ख़ियों तक सीमित नहीं रहतीं — वे इससे कहीं आगे जाकर नंदुरबार के आदिवासी इलाक़ों की ज़मीनी हक़ीक़त, चुनौतियों और प्रशासनिक प्रयासों पर विस्तार से बात करती हैं.

इस इंटरव्यू की ख़ास बात ये है कि रिपोर्ट यानि श्याम सुंदर ने नंदुरबार के सबसे दुर्गम इलाकों में कई दिनों तक लोगों की ज़िंदगी और चुनौतियों को देखने समझने के बाद यह बातचीत रिकॉर्ड की –

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