HomeLaw & Rightsअसम के जनजातीय संगठनों ने 6 समुदायों को ST लिस्ट में जोड़ने...

असम के जनजातीय संगठनों ने 6 समुदायों को ST लिस्ट में जोड़ने का प्रस्ताव ख़ारिज किया

असम के विधानसभा चुनाव में छह समुदायों यानि कोच राजवंशी, चुटिया, मटक, मोरान, ताई अहोम और टी ट्राइब्स को अनुसूचित जनजाति की सूचि में शामिल करने का फ़ैसला बड़ा मुद्दा बनेगा.

असम में The Coordination Committee of Tribal Organisations Of Assam नाम के संगठन ने राज्य में 6 नए समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूचि में शामिल करने के प्रस्ताव को ख़ारिज किया है.

इस संगठन का कहना है कि असम के मंत्री समूह ने जिन छह नए समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की सिफ़ारिश की है वह असवैंधानिक है. राज्य में जिन 6 समुदायों को एसटी लिस्ट में शामिल करने की सिफ़ारिश की गई है उनमें कोच राजवंशी, चुटिया, मटक, मोरान, ताई अहोम और टी ट्राइब शामिल हैं.

असम के इस जनजातियों समूहों के इस मंच (CCTOA) में कुल 14 संगठन शामिल हैं. 

इस मंच ने असम विधानसभा (Assam Assembly) को सौपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर मंत्री समूह की बात मान कर इन 6 समुदायों को ST लिस्ट में शामिल किया जाता है तो राज्य के जनजातीय समूहों के राजनीतिक अधिकार ख़त्म हो जाएंगे.

नवंबर 2025 में विधानसभा को सौपी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्री समूह की सिफ़ारिश ग़ैर कानूनी और असवैंधानिक है. 

इस मंच ने सरकार को एकबार फिर यह याद दिलाया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का दर्जा तय करने के आधार बिलकुल अलग हैं. अनुसूचित जनजाति हिंदू धर्म की जाति व्यवस्था के आधार पर होता है. लेकिन अनुसूचित जनजाति की पहचान के मापदंड के पैमाने उनका मुख्यधारा से अलग थलग होना, विशिष्ट संस्कृति और आदिम लक्षण हैं. 

असम की राजनीति में इन छह समुदायों—चुटिया, कोच राजबंशी, मटक, मोरान, ताई अहोम और चाय जनजातियों—का बहुत बड़ा प्रभाव है.

असम की राजनीति में इन छह समुदायों—चुटिया, कोच राजबंशी, मटक, मोरान, ताई अहोम और चाय जनजातियों—का बहुत बड़ा प्रभाव है।

जनसंख्या: ये छह समुदाय मिलकर असम की कुल आबादी का लगभग 30-40% हिस्सा हैं. इनमें ‘टी-ट्राइब्स’ (चाय जनजातियां) सबसे ज्यादा हैं, जिनकी आबादी करीब 60-70 लाख है.

राजनीतिक प्रभाव: असम की 126 विधानसभा सीटों में से 80 से अधिक सीटों पर इनका सीधा प्रभाव है. चाय बागान के मजदूर और अहोम समुदाय ऊपरी असम (Upper Assam) में चुनाव का रुख तय करते हैं.

ST दर्जे की राजनीति: भाजपा ने कई चुनावों में इन्हें अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने का वादा किया है. इसका मुख्य उद्देश्य इन समुदायों के वोट बैंक को पक्का करना है. हालांकि, असम की मौजूद जनजातियां (जैसे बोडो और मिसिंग) इसका विरोध कर रही हैं. उन्हें डर है कि नए समुदायों के आने से उनके आरक्षण और अधिकारों में कटौती हो जाएगी.

समाधान की कोशिश: सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए एक नई श्रेणी ‘ST (Valley)’ बनाने का प्रस्ताव दिया है, ताकि पुराने आदिवासियों का हक न मारा जाए, लेकिन यह मामला अभी भी केंद्र सरकार के पास लटका हुआ है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments