देश के ग्राणीण इलाकों में रोज़गार की गारंटी देने वाले क़ानून मनरेगा (MNREGA) को ख़त्म कर दिया गया है. इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और ग़ैर सरकारी संगठनों के बीच ज़बरदस्त बहस चल रही है.
संसद के बजट सत्र 2026 में भी मनरेगा पर बहस होगी ऐसी उम्मीद की ही जानी चाहिए. लेकिन इस बहस से दूर सतपुड़ा के जंगलों में बसे एक आदिवासी के लिए इस क़ानून का मतलब क्या था?
यह समझने के लिए मैं भी भारत की टीम महाराष्ट्र के नंदुरबार पहुंची. महाराष्ट्र देश का सबसे अमीर राज्य बताया जाता है जबकि नंदुरबार को देश के सबसे पिछड़े और ग़रीब ज़िलों में गिना जाता है.

