आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में सत्यवेदु पुलिस ने 9 वर्षीय आदिवासी लड़के यानाडी वेंकटेशु (Yanadi Venkateshu) को अवैध रूप से बंधक बनाने और उसके बाद उसकी मौत के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है.
पुत्तूर के डीएसपी जी रविकुमार ने गुरुवार को सत्यवेदु पुलिस स्टेशन में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान मामले के बारे में विस्तार से बताया.
गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान एन मुथु (60), उसकी पत्नी एम धनभाग्यम (52) और उसके बेटे एम राजशेखर (32) के रूप में हुई है. ये सभी तिरुपति जिले के सत्यवेदु मंडल के एन अग्रहारम (N Agraharam) के निवासी हैं.
डीएसपी के मुताबिक, वेंकटेशु की मां अंकम्मा, गुडूर मंडल के चावतापलेम की निवासी है. जो अपने साथी प्रकाश और अपने तीन बच्चों के साथ नेल्लोर जिले के दत्तालुर मंडल के एक खेत में मजदूरी कर रही थी.
लेकिन फिर सत्यवेदु मंडल के एनआर अग्रहारम के मुथु और धनभाग्यम ने वेंकटेशु के परिवार से संपर्क किया और उन्हें 10 हज़ार रुपये मासिक वेतन पर काम देने का वादा किया और 15 हज़ार रुपये एडवांस भी दिए.
वेंकटेशु के परिवार ने एक साल तक बेहद मुश्किलरक परिस्थितियों में मुथु के लिए खेती-बाड़ी और बत्तख पालन का काम किया. लेकिन जब वेतन बढ़ाने की मांग की तो मुथु ने मना कर दिया.
वहीं अंकम्मा अपने पति के निधन के बाद अंतिम संस्कार के लिए अपने पैतृक गांव लौट आईं.
उधर मुथु ने कहा कि अगर बाकी परिवार उसके लिए काम करना जारी रखता है तो वह 25 हज़ार रुपये का कर्ज चुका देगा.
जब काम की परिस्थितियां असहनीय हो गईं तो अनकम्मा ने काम छोड़ने की कोशिश की, लेकिन उसे 45 हज़ार रुपये चुकाने के लिए कहा गया. तुरंत पैसे का इंतजाम नहीं कर पाने की स्थिति में उसने अपने बेटे वेंकटेशु को मुथु के पास छोड़ दिया ताकि वह पैसे लेकर वापस आ सके.
वेंकटेशु ने अपनी माँ से उसे वहां से बचाने की गुहार लगाई. दोनों की आखिरी बातचीत 15 अप्रैल को हुई थी.
जब तक अनकम्मा पैसे लेकर वापस लौटी तब मुथु ने टालमटोल करने वाली बातें की. जैसे कि लड़के को काम के लिए भेज दिया गया है, फिर कहा कि उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में कहा कि वह भाग गया.
अगले नौ महीनों तक लड़के से कठोर काम करवाया गया और वह अक्सर अपनी मां के पास लौटने के लिए रोता रहा.
वहीं अनकम्मा ने भी बार-बार उसकी रिहाई की गुहार लगाई लेकिन मुथु ने उसे गुमराह किया. आखिरकार, उसने 19 मई को सत्यवेदु पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई.
डीएसपी रविकुमार की निगरानी में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 19 मई, 2025 को बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, बाल श्रम अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और एससी/एसटी अत्याचार अधिनियम सहित कई कानूनों के तहत मामला दर्ज किया.
इसके बाद पुलिस ने मुथु, उसकी पत्नी धनभाग्यम और उसके बेटे राजशेखर को हिरासत में लिया.
जांच में पता चला कि वेंकटेशु अप्रैल की शुरुआत में बहुत ज्यादा बीमार पड़ गया था और उसे 11 अप्रैल को पुडुपालेम के एक अस्पताल में ले जाया गया था. इलाज के दौरान 12 अप्रैल को उसकी मौत हो गई. सीसीटीवी फुटेज ने इस बात की पुष्टि की.
वहीं कानूनी परिणामों के डर से आरोपी ने कथित तौर पर परिवार के सदस्यों की मदद से लड़के के शव को पलार नदी में दफना दिया.
शव को तमिलनाडु के कांचीपुरम में दफनाया गया क्योंकि यह मुथु का ससुराल था और वेंकटेशु मुथु की सास की देखरेख में बत्तख पालन के लिए वहां लगा हुआ था.
कांचीपुरम के उप-कलेक्टर और मजिस्ट्रेट रफीक की निगरानी में पुलिस ने शव को बाहर निकाला और चेंगलपट्टू मेडिकल कॉलेज में शव का पोस्टमार्टम कराया.
डीएसपी ने पुष्टि की कि तीनों आरोपियों को रिमांड पर लिया गया है.
यानाडी समुदाय के सदस्यों को शोषण का सामना करना पड़ रहा
दुख की बात यह है कि वेंकटेशु की कहानी कोई इकलौता मामला नहीं है. यानाडी समुदाय को लंबे समय से व्यवस्थित शोषण का सामना करना पड़ रहा है.
बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के तहत, अग्रिम राशि देने, आवागमन की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने और व्यक्तियों को काम छोड़ने से रोकने जैसी प्रथाएं आपराधिक अपराध हैं. फिर भी इस तरह के उल्लंघन अनियंत्रित रूप से जारी हैं.
पिछले महीने ही नेल्लोर जिले के एक और यानाडी जोड़े, नम्बुरु पद्मा और अग्नि ने बताया था किया कि वे 15 साल से अधिक समय से बंधुआ मजदूरी में फंसे हुए थे, जो वस्तुओं की तरह बिचौलियों के बीच से होकर गुज़रता था.
पिछले वर्ष आंध्र प्रदेश और उसके बाहर यानाडी समुदाय के करीब 50 लोगों को बंधुआ मजदूरी से बचाया गया है. अभी भी बत्तख पालन, चारकोल उत्पादन, ईंट भट्टे और चावल मिलों जैसे क्षेत्रों में शोषण व्याप्त है.
(Image is for representative purpose only)

