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SBI का सॉफ़्टवेयर ईसाइयों को अनुसूचित जनजाति (ST) का विकल्प नहीं दे रहा: अरुणाचल फ़ोरम

फ़ोरम का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश में ईसाई ST सदस्यों को SBI खाते खोलने या YONO और अन्य डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए KYC अपडेट करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

अरुणाचल क्रिश्चियन फ़ोरम (Arunachal Christian Forum) ने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) अधिकारियों से शिकायत की है कि बैंक के डिजिटल बैंकिंग और KYC प्लेटफ़ॉर्म राज्य की अनुसूचित जनजातियों (STs) से जुड़े ईसाइयों को गलत तरीके से “सामान्य” (General) श्रेणी में डाल रहे हैं.

अरुणाचल क्रिश्चियन फ़ोरम (ACF) ने कहा कि जब कोई आवेदक खुद को ईसाई बताता है, तो डिजिटल सिस्टम उसे अपने-आप ‘जनरल’ कैटेगरी में डाल देता है.

राज्य की राजधानी ईटानगर में SBI के रीजनल मैनेजर को लिखे एक पत्र में ACF के प्रेसिडेंट जेम्स टेची तारा और सेक्रेटरी जनरल योमरिक लोम्बी ने चेतावनी दी कि अगर सरकारी बैंक ने 15 दिनों के अंदर ज़रूरी तकनीकी सुधार नहीं किए, तो वे आंदोलन करेंगे.

फ़ोरम ने दावा किया कि अरुणाचल प्रदेश में “संवैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त” अनुसूचित जनजाति (STs) से जुड़े ईसाई समुदाय के सदस्यों को SBI YONO ऐप और अन्य डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए बैंक खाते खोलने या अपना KYC अपडेट करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

फ़ोरम ने आरोप लगाया, “हमारे ध्यान में यह बात आई है कि जब कोई ग्राहक SBI बैंकिंग ऐप में धर्म के विकल्प से ‘ईसाई’ चुनता है, तो सॉफ़्टवेयर सिस्टम ग्राहक को ‘अनुसूचित जनजाति’ श्रेणी चुनने की अनुमति नहीं देता है और इसके बजाय उन्हें ‘सामान्य’ श्रेणी में भेज देता है.”

इस वर्गीकरण को संभावित रूप से भेदभावपूर्ण बताते हुए, फ़ोरम ने तर्क दिया कि 1950 के अनुसूचित जनजाति आदेश में धर्म के आधार पर किसी को बाहर रखने का कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत अधिसूचित ST का कोई सदस्य केवल इसलिए ST नहीं रह जाता क्योंकि वह ईसाई धर्म अपनाता है.

ACF के पत्र में कहा गया, “SBI के पास किसी ऐसे आदिवासी ईसाई ग्राहक का नाम लिस्ट से हटाने का अधिकार नहीं है जिसके पास वैध ST सर्टिफ़िकेट हो. SBI सिर्फ़ उनके बताए गए धर्म के आधार पर किसी आदिवासी ईसाई को ‘जनरल’ कैटेगरी में नहीं डाल सकता.”

फ़ोरम ने SBI अधिकारियों से कहा कि वे ऑनबोर्डिंग लॉजिक की जाँच करें, साफ़ करें कि क्या कोई रेगुलेटरी या रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया का निर्देश इस तरह के वर्गीकरण की इजाज़त देता है, और सॉफ़्टवेयर को ठीक करें ताकि धर्म और आदिवासी दर्जे को एक-दूसरे से अलग न माना जाए.

संगठन ने उठाए गए सुधारात्मक कदमों पर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा और चेतावनी दी कि यदि इस समय-सीमा के भीतर समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वह अरुणाचल प्रदेश में SBI की सभी शाखाओं का घेराव करने के लिए मजबूर होगा.

SBI अधिकारियों ने कहा कि वे इस मामले की जाँच कर रहे हैं.

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