केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को मध्य प्रदेश वन विभाग और अन्य अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनके विदिशा लोकसभा क्षेत्र में आदिवासी परिवारों के घर तोड़ दिए, फसलें बर्बाद कर दीं और एक कुएं को मिट्टी से भर दिया.
विपक्षी कांग्रेस ने इस घटना को लेकर आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव के बीच खींचतान चल रही है, जिसका खामियाजा आदिवासी परिवारों को भुगतना पड़ रहा है.
वहीं शिवराज चौहान ने बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गाँव का दौरा किया, जहां कथित तौर पर यह कार्रवाई की गई थी.
उनके कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, प्रभावित परिवारों से मुलाकात के बाद उन्होंने इस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई.
पहले भी अधिकारियों को दी गई थी कार्रवाई न करने की हिदायत
वरिष्ठ भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान कई बार सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. वह नवंबर 2005 से दिसंबर 2018 तक और फिर मार्च 2020 से दिसंबर 2023 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे.
उनके कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, कुछ महीने पहले भी वन विभाग और जिला प्रशासन ने इसी तरह की कार्रवाई करने की कोशिश की थी. उस समय चौहान ने अधिकारियों को आदिवासी परिवारों के घर नहीं तोड़ने का निर्देश दिया था.
बयान में कहा गया है कि कथित अतिक्रमण के आरोप में रविवार को दोबारा घरों को तोड़ने की कार्रवाई की गई, जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान पहले ही अधिकारियों को ऐसा नहीं करने का निर्देश दे चुके थे.
मुख्यमंत्री के सामने भी उठाएंगे मामला
शिवराज सिंह चौहान ने घटनास्थल से ही मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल से फोन पर बात की. उन्होंने उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी और कार्रवाई पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई.
बयान के अनुसार, उन्होंने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से भी बातचीत की और कहा कि वह जल्द ही इस मामले को मुख्यमंत्री मोहन यादव के समक्ष उठाएंगे.
चौहान ने कहा कि गरीब परिवारों को बेघर करने के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा.
उन्होंने कहा, “जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उनके लिए नए घर बनाए जाएंगे. जब तक उनके रहने की स्थायी व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उनके रहने और खाने-पीने का अस्थायी इंतजाम सुनिश्चित किया जाएगा.”
शिवराज सिंह चौहान ने घरों को तोड़ने, फसलों को बर्बाद करने और कुएं को मिट्टी से भरने को लेकर प्रशासन के कामकाज पर सवाल उठाए. वह इस बात से भी नाराज थे कि मौके पर वन विभाग या प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं था.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस कार्रवाई से न सिर्फ़ घर बर्बाद हुए, बल्कि परिवारों की आजीविका पर भी असर पड़ा.
कांग्रेस ने भाजपा सरकार के भीतर खींचतान का आरोप लगाया
इस बीच, तोड़-फोड़ का एक वीडियो शेयर करते हुए MP विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफ्रॉम X पर लिखा, “मोहन-मामा (चौहान) के बीच चल रही खींचतान के बीच आदिवासी परिवारों को उजाड़ा जा रहा है.”
उन्होंने आरोप लगाया कि कोसमी गांव में बरेला आदिवासी समुदाय के परिवारों की फ़सलें बर्बाद की जा रही हैं और उनके घर तोड़े जा रहे हैं.
उन्होंने आरोप लगाया, “BJP सरकार के अंदरूनी झगड़ों की वजह से गरीब आदिवासी परिवारों के बेघर होने का खतरा पैदा हो गया है.”
सिंघार ने सवाल किया कि सत्ताधारी खेमे में कथित खींचतान की वजह से गरीब परिवारों को क्यों भुगतना पड़े.

