अपने स्कूलों और हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर नासिक से मार्च करने वाले आदिवासी छात्रों को मंगलवार (6 अक्टूबर, 2026) को कांग्रेस के महाराष्ट्र मुख्यालय में हिरासत में ले लिया गया और मुंबई से बाहर भेज दिया गया.
एक दिन पहले ही प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने पुलिस पर उनके विरोध प्रदर्शन को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था.
यह कार्रवाई तब हुई जब मुंबई के आज़ाद मैदान में विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति न मिलने के बाद छात्र गवर्नर जिष्णु देव वर्मा से मिलने की ज़िद पर अड़े रहे.
तिलक भवन पर मार्च रोका गया
तिलक भवन, जो राज्य कांग्रेस का मुख्यालय है और जहां छात्र सोमवार से रुके हुए थे, वहां तैनात पुलिस ने उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया जब वे जाने की तैयारी कर रहे थे. जल्द ही छात्रों को प्राइवेट बसों में बिठाकर ले जाया गया.
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्होंने मंत्रालय तक मार्च निकालने की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें तिलक भवन पर ही रोक दिया.
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, उन्होंने अपनी मांगों को उठाने के लिए मंत्रालय की ओर मार्च करने की योजना बनाई थी. हालांकि, तिलक भवन पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और मार्च को आगे बढ़ने से पहले ही रोक दिया गया.
पुलिस की मौजूदगी के कारण रास्ते में बाधा उत्पन्न हुई और आसपास के इलाके में ट्रैफिक प्रभावित हुआ.
आयोजकों ने बताया कि उन्होंने पहले मुंबई पुलिस से आज़ाद मैदान में विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी थी. लेकिन प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई.
इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगें रखने के लिए मंगलवार को राज्यपाल से मिलने का मौका मांगा.
आयोजकों का आरोप है कि राज्यपाल से मिलने की अनुमति देने के बजाय, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया और बसों में ले जाया गया.
उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों को ले जाने वाली बसों को नासिक और जलगांव सहित अलग-अलग जगहों पर ले जाया गया.
दरअसल, जब पुलिस ने आज़ाद मैदान में विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी, तो कांग्रेस ने लगभग 200-300 छात्रों को आश्रय दिया था.
वहीं हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की सही संख्या और उन्हें हिरासत में लेने के कारणों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है.
शहर से बाहर ले जाए जाने से पहले छात्रों ने 25 अक्टूबर को मुंबई लौटने का संकल्प लिया.
प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे और 25 अक्टूबर को एक और प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि वे आज़ाद मैदान में विरोध प्रदर्शन करने के लिए एक बार फिर मुंबई पुलिस से अनुमति मांगेंगे.
छात्रों की मांगें
छात्रों ने 28 सितंबर को अपना मार्च शुरू किया और रविवार देर रात मुंबई पहुंचे. वे आदिवासी स्कूलों में छात्रों की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं.
साथ ही छात्रों ने गढ़चिरौली के एक स्कूल में सांप के काटने से मरने वाली तीन लड़कियों के परिवारों के लिए प्रति परिवार 1 करोड़ रुपये के मुआवज़े की मांग की है.
छात्रों ने ग्रांट के वितरण में कथित अनियमितताओं की जांच और ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की भी मांग की.
इसके अलावा उन्होंने राज्य के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके के इस्तीफ़े की मांग करते हुए आरोप लगाया कि वे अपनी ज़िम्मेदारियां निभाने में नाकाम रहे हैं.

