कोंडा रेड्डी आदिवासी बच्चों के लिए विशेष आवासीय स्कूलों की स्थापना

पहाड़ियों पर रहने वाले कोंडा रेड्डी आदिवासियों के 149 परिवारों के बच्चों के लिए गुरुवार को कुनावरम मंडल के कुटूरू गट्टी बस्ती में कोंडा बाड़ी खोली गई. चिंतूर एजेंसी इलाक़े में यह दूसरी कोंडा बाड़ी है. पहला स्कूल पिछले साल मामिला बांदा बस्ती में स्थापित किया गया था.

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एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसी (ITDA) चिंतूर के अधिकारियों ने कोंडा बाड़ी नाम से एक आवासीय विद्यालय की स्थापना की है. यह स्कूल आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी ज़िले के आदिवासी इलाक़े में नौ पहाड़ी बस्तियों में रहने वाले कोंडा रेड्डी आदिवासियों के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा पहुंचाएगा.

कोंडा रेड्डी जनजाति राज्य में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) की श्रेणी में आते हैं.

पहाड़ियों पर रहने वाले कोंडा रेड्डी आदिवासियों के 149 परिवारों के बच्चों के लिए गुरुवार को कुनावरम मंडल के कुटूरू गट्टी बस्ती में कोंडा बाड़ी खोली गई. चिंतूर एजेंसी इलाक़े में यह दूसरी कोंडा बाड़ी है. पहला स्कूल पिछले साल मामिला बांदा बस्ती में स्थापित किया गया था.

कोंडा बाड़ियों के कुलने से पहले इन नौ बस्तियों के कोंडा रेड्डी आदिवासी बच्चे पहाड़ी के नीचे स्थित अपने स्कूल तक पहुंचने के लिए डेढ़ घंटे पैदल चलकर जाते थे. माना जाता है कि रोज़ की इस मेहनत ने ‘आउट ऑफ़ स्कूल चिल्ड्रन’ (OSC) दर में वृद्धि की है.

आईटीडीए चिन्तूर परियोजना अधिकारी ए वेंकट रमणा ने द हिन्दू को बताया, “कोंडा बाड़ी एक रेज़िडेंशियल स्कूल है. यह स्कूल छोड़ चुके बच्चों के साथ-साथ दूसरे बच्चों को आवास, भोजन और शिक्षा प्रदान करता है. यहां कक्षा एक से तीन तक शिक्षा दी जाती है.”

एनरोलमेंट ड्राइव

गुरुवार को पहले दिन स्कूल में कुल 30 छात्रों ने दाखिला लिया. स्कूल में दो शिक्षक हैं, और दोनों एक-एक दिन छोड़कर स्कूल में पढ़ाने आते हैं. ग्राम स्वयंसेवक इस स्कील का प्रभारी है.

इन नौ कोंडा रेड्डी आदिवासी बस्तियों में स्कूल जाने लायक उम्र के कम से कम 130-140 बच्चे हैं. आईटीडीए अधिकारियों का इन सभी बस्तियों के हर परिवार से मिलने का प्लान है, ताकि माता-पिता को अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए राज़ी किया जा सके.

पहाड़ियों पर बसे इन कोंडा रेड्डी आदिवासियों की हर बस्ती में परिवारों की अधिकतम संख्या 25 है. इलाके की दुर्गमता को देखते हुए, स्कूल चलाना कोई आसान काम नहीं है. लेकिन प्रशासन को उम्मीद है कि उन्हें सफ़लता मिलेगी.

जहां तक ‘आउट ऑफ स्कूल’ बच्चों की बात है, उनके लिए ब्रिज कोर्स चलाया जाएगा, ताकि वो बाद में शिक्षा जारी रखने के लिए अपने इलाक़े के आश्रम स्कूलों में दाखिला ले सकें.

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