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सड़क न होने के कारण आदिवासी महिला को 8 किलोमीटर तक डोली से अस्पताल ले जाना पड़ा

अलाकट्टू आदिवासी बस्ती में पक्की सड़क बनाने की मंजूरी लगभग आठ वर्षों से लंबित है. इसके लिए पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन एवं वन मंत्रालय के PARIVESH पोर्टल पर मंजूरी का मामला अटका हुआ है.

तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले के पेन्नागारम (Pennagaram) के पास स्थित अलाकट्टू आदिवासी बस्ती (Alakattu tribal hamlet) के निवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग अब और तेज हो गई है.

ग्रामीण प्रशासन से क्षेत्र में सड़क परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने और काम शुरू कराने की मांग कर रहे हैं.

इस मांग के तेज होने का कारण यह है कि 25 वर्षीय एक महिला को भारी बारिश के बीच पेट में तेज दर्द होने पर डोली (अस्थायी स्ट्रेचर) में बिठाकर 8 किलोमीटर नीचे पालाकोड सरकारी अस्पताल ले जाना पड़ा.

पिछले तीन वर्षों में पूर्वोत्तर मानसून के कारण धर्मपुरी ज़िले में भारी बारिश हुई है. इससे इलाके में कई जलस्रोत फिर से भर गए हैं. लेकिन अलाकाट्टू के लोगों के लिए स्थिति बहुत मुश्किल हो गई क्योंकि बस्ती से नीचे की ओर जाने वाली एकमात्र कच्ची सड़क बारिश के पानी में बह गई, जिसके कारण वहां वाहनों का इस्तेमाल करना संभव नहीं रह गया.

अलाकट्टू के निवासी जी. शिवप्पा ने बताया, “रात करीब 3 बजे एन. मल्लिका (25), जो गौरी नोम्बु त्योहार के लिए अपने पैतृक गांव अलाकट्टू आई थीं, उन्होंने पेट में तेज दर्द की शिकायत की. उनकी चीख-पुकार से पूरा गांव जाग गया. उन्हें इस तरह तकलीफ में देखना हमारे लिए मुश्किल था. इसलिए हमने डोली बनाई और उन्हें डोली में बैठाकर पहाड़ी से नीचे सींगाडु तक ले गए. वहां से ऑटोरिक्शा के जरिए उन्हें पालाकोड सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया. बारिश के कारण हमारी कच्ची सड़क बह चुकी थी इसलिए हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था.”

एक अन्य निवासी एस. पसुवराज ने ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया, “पिछले दो दशकों से हम राज्य सरकार से अपने गांव तक पक्की तारकोल वाली सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं. सड़क न होने के कारण लोगों को तीन आदिवासी बस्तियों – अलाकट्टू, कोट्टूर और एरिमलाई तक पहुंचने के लिए लगभग 8 किलोमीटर तक खड़ी और पथरीली पहाड़ी पर पैदल चढ़ना और पड़ता है.”

उन्होंने बताया कि करीब एक साल पहले तक जरूरी सामान ढोने के लिए गधों का इस्तेमाल किया जाता था.

हालांकि, बाद में प्रखंड विकास अधिकारी (BDO) कार्यालय के निर्देश पर कुछ अस्थायी कच्ची सड़कें बनाई गईं. इससे दोपहिया वाहनों, जीप और ट्रैक्टरों की आवाजाही संभव हो गई. लेकिन बारिश होते ही ये सड़कें फिर से इस्तेमाल के लायक नहीं रहतीं.

पसुवराज ने कहा कि क्षेत्र में पक्की सड़क बनाने की मंजूरी लगभग आठ वर्षों से लंबित है. इसके लिए पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन एवं वन मंत्रालय के PARIVESH पोर्टल पर मंजूरी का मामला अटका हुआ है. उन्होंने प्रशासन से इस प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की.

सड़क परियोजना के लिए वन भूमि के उपयोग की मंजूरी लंबित

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित परियोजना के तहत केसरकुली आरक्षित वन और तिरुमलवाड़ी वन क्षेत्र की 4.81 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग कर 6.38 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने की योजना थी.

हालांकि, बाद में प्रस्तावित वन क्षेत्र को कावेरी दक्षिण वन्यजीव अभयारण्य के रूप में अधिसूचित कर दिया गया। इसके बाद मंत्रालय की ओर से परियोजना को लेकर कई सवाल और स्पष्टीकरण मांगे गए.

अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने मांगी गई सभी जानकारियां तत्काल उपलब्ध करा दी हैं और मंजूरी मिलते ही सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा. फिलहाल प्रशासन मंजूरी का इंतजार कर रहा है.

महिला की हालत स्थिर

इस बीच, पालाकोड सरकारी अस्पताल के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि मल्लिका पेट के संक्रमण से पीड़ित थीं. इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है और फिलहाल उनकी हालत स्थिर है.

यह घटना एक बार फिर अलाकट्टू और आसपास की आदिवासी बस्तियों में सड़क और परिवहन सुविधाओं की कमी को सामने लाती है. विशेष रूप से बारिश के दौरान कच्ची सड़क के बह जाने से ग्रामीणों के लिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है.

(File image)

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