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ओडिशा : आमों की बिक्री में गिरावट के कारण आदिवासियों का जीवन हुआ प्रभावित

ओडिशा के क्योंझर ज़िले में लगभग आधी आबादी आदिवासी है. 2011 की जनगणना के मुताबिक ज़िले में 8 लाख 18 हज़ार 878 आदिवासी रहते हैं.

ओडिशा (Tribes of Odisha) के क्योंझर ज़िले (Kendujhar District) में रहने वाले आदिवासी आधे-पौने दाम में आम और अन्य मौसमी फलों को बेचने के लिए मजबूर हैं.

इस ज़िले में रहने वाले ज्यादातर आदिवासी आम और अन्य मौसमी फलों के सहारे ही अपना जीवनयापन कर रहे हैं. इन्हीं मौसमी फलों और आमों की बिक्री में भारी गिरावट आई है, जिसके कारण आदिवासी किसान परेशान है.

मौसमी फलों की बिक्री से अच्छी खासी कमाई हो जाती है. इसलिए ज़िले में रहने वाले ज्यादातर आदिवासी फलों की बिक्री का कारोबार करते हैं.

लेकिन इन फलों को स्टोर करने के लिए आदिवासी बस्तियों में पर्याप्त मात्रा में भंडार गृह मौजूद नहीं है और न ही पास में कोई हाट है.

इसलिए आदिवासी फलों को खराब होने से पहले ही मज़बूरन आधे-पौने दाम में बेच देते हैं.

यह भी देखा गया है कि उर्वरकों के अत्याधिक प्रयोग की वज़ह से भी स्थानीय आमों की बिक्री में गिरावट आई है.

इन दिनों आदिवासी, जिनमें ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं, वो अपने बच्चों के साथ गांवों की सड़कों और शहरी बाजारों में फलों को बेचने के लिए चिलचिलाती धूप में घंटों इंतजार करते देखी जा सकती हैं.

अफसोस की बात यह है कि इतने घंटे चिलचिलाती धूप में खड़े रहने के बावजूद भी इन्हें अपने उत्पादन का उचित दाम नहीं मिल पाता.

इसके अलावा पेड़ों की आंधाधुंध कटाई के कारण भी स्थानीय आम के उत्पादन में गिरवाट आई है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि राज्य सरकार को इस जिले में उगाए जाने वाले आमों के लिए उचित भंडारण और विपणन सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए. साथ ही जिला अधिकारियों को आदिवासियों की मदद के लिए आगे आना चाहिए.

उन्होंने कहा कि सरकार स्थानीय आमों की बड़ी मात्रा खरीद सकती है और उन्हें अलग-अलग राज्यों में संचालित फूड प्रोसेसिंग यूनिट में इस्तेमाल कर सकती है. फलों का उपयोग जैम, जेली, जूस और अचार जैसे अन्य उत्पाद बनाने में किया जा सकता है.

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