हाटी समुदाय: जनजाति सूचि में शामिल करने का मजबूत आधार है ?

हाटी समुदाय को जनजाति की सूचि में शामिल करने को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल चुकी है. इस समुदाय को जनजाति की सूचि में शामिल करने का कितना मजबूत आधार है और दलित संगठनों की तरफ से इस फैसले का विरोध क्यों हो रहा है. इस मसले पर केंद्रीय हाटी समिति के अध्यक्ष अमिचंद कमल से हमने विस्तार से बातचीत की है.

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हिमाचल प्रदेश के सिरमौर ज़िले के हाटी समुदाय को केंद्र सरकार ने जनजाति की सूचि में शामिल करने का फैसला किया है. इस सिलसिले में कैबिनेट ने प्रस्ताव पास कर दिया है. अब संसद में इस संबंध में बिल आयेगा. उसके बाद इस समुदाय को जनजाति मान लिया जाएगा.

हाटी समुदाय के लोग 50 साल से ज़्यादा से जनजाति के दर्जे के लिए लड़ रहे हैं. इस मांग के लिए उन्होंने लंबा आंदोलन किया है. 1967 से 2022 के बीच में जितना पानी गिरी नदी में बहा है शायद उतना ही उतार-चढ़ाव हाटी समुदाय को जनजाति का दर्जा दिलाने की लड़ाई लड़ने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं ने देखे हैं.

हाटी समुदाय को जनजाति का दर्जा देने की सिफारिश उसी समय हुई थी जब जौनसार बावर के इलाके के समुदाय को यह दर्जा दिया गया था. जौनसार बावर और हिमाचल प्रदेश के गिरीपार के इलाके की संस्कृति, भाषा और जीवनशैली में कोई फर्क नहीं है.

लेकिन आज के उतराखंड में बसे जौनसार इलाके के लोगों को संविधान से कई तरह के अधिकार मिलते हैं क्योंकि वो जनजाति में शामिल हैं. लेकिन हाटी समुदाय के लोगों को यह सुरक्षा प्राप्त नहीं थी.

हाटी समुदाय को जनजाति की सूचि में शामिल करने के लिए किये गए संघर्ष के बारे में हमने केंद्रीय हाटी समिति के अध्यक्ष डॉक्टर अमीचंद कमल से बातचीत की. हमने उनसे इस संघर्ष के इतिहास के साथ साथ यह भी पूछा कि कुछ दलित संगठन हाटी समुदाय को जनजाति का दर्जा दिए जाने का विरोध किया है.

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