आदिवासी कोटा 6 से बढ़कर 10 फीसदी होगा, तेलंगाना में चुनाव की आहट

सीएम केसीआर ने कहा कि केंद्र ने तेलंगाना के साथ कई अन्याय किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र राज्य में एक आदिवासी विश्वविद्यालय और एक इस्पात कारखाना स्थापित करने की प्रतिबद्धताओं से पीछे हट गया है.

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तेलंगाना (Telangana) के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (K Chandrashekhar Rao) ने आदिवासियों के लिए एक बड़ी घोषणा की है. राज्य में अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribe) के लिए आरक्षण को मौजूदा छह फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया जाएगा. सात साल पहले राज्य विधानमंडल द्वारा ये पारित किया गया था.

तेलंगाना राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह के रूप में हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने घोषणा की कि एक सप्ताह के भीतर एसटी कोटा बढ़ाने के लिए एक सरकारी आदेश (जीओ) जारी किया जाएगा.

सीएम केसीआर ने एसटी आरक्षण विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी देने में देरी के लिए केंद्र की आलोचना करते हुए कहा कि हम मोदी सरकार से विधेयक को मंजूरी देने का अनुरोध करते हुए थक चुके हैं.

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने कहा कि क्या केंद्र राष्ट्रपति को उनकी सहमति के लिए विधेयक भेजने से रोक रहा है. राष्ट्रपति भी एक आदिवासी हैं और मुझे यकीन है कि वह तुरंत अपनी मंजूरी दे देंगी. उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह तय करना है कि क्या वह जीओ का सम्मान करेंगे या इसके परिणाम भुगतेंगे.

उन्होंने बीजेपी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अपनी विभाजनकारी और घटिया राजनीति के लिए तेलंगाना का दौरा कर रहे हैं लेकिन बीसी कोटा विधेयक को मंजूरी दिलाने के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं.

तेलंगाना के मुख्यमंत्री की घोषणा पर आदिवासी संगठनों ने संतोष प्रकट किया है. लेकिन साथ ही जोड़ा है कि यह काम बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था. इस सिलसिले में तेलंगाना गिरिजा संघम के सह सचिव बंडारू रवि ने MBB से बातचीत में कहा, “संयुक्त आंध्र प्रेदश में आदिवासी आबादी क़रीब 6 प्रतिशत थी. लेकिन तेलंगाना अलग राज्य बनने के बाद इस राज्य में हमारी आबादी अब 9 प्रतिशत से ज़्यादा है. इसलिए हम पिछले 8 साल से यह माँग कर रहे थे कि आदिवासी समुदायों के लिए आरक्षण बढ़ाया जाना चाहिए. “

केसीआर ने पोडु भूमि के मुद्दे के निपटारे और जमीन या किसी अन्य आजीविका के बिना अनुसूचित जनजाति परिवारों की पहचान के बाद आदिवासी परिवारों को 10 लाख रुपये की सहायता के साथ दलित बंधु की तर्ज पर गिरिजन बंधु को लागू करने की भी घोषणा की.

उन्होंने तर्क दिया कि आरक्षण की मात्रा बढ़ाने के लिए कोई संवैधानिक बाधा नहीं है. उन्होंने कहा कि संविधान यह नहीं कहता है कि कुल आरक्षण 50 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि, तमिलनाडु 69 फीसदी आरक्षण प्रदान दे रहा है. क्योंकि केंद्र ने इसे संविधान की 7वीं अनुसूची में शामिल किया है. उन्होंने पूछा कि केंद्र इसे तेलंगाना में क्यों लागू नहीं कर रहा है.

उन्होंने कहा कि केंद्र ने तेलंगाना के साथ कई अन्याय किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र राज्य में एक आदिवासी विश्वविद्यालय और एक इस्पात कारखाना स्थापित करने की प्रतिबद्धताओं से पीछे हट गया है.

यह कहते हुए कि तेलंगाना विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है, केसीआर ने लोगों को उनके संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए विभाजित करने की कोशिश कर रही विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ आगाह किया.

उन्होंने तेलंगाना में शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को पूरे देश में लागू करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि तेलंगाना को केंद्र में चीजों को ठीक करने के लिए राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देश में लोगों और किसानों का शासन हो.

तेलंगाना में केसीआर के समय में आदिवासी विकास के बारे में बात करते हुए बंडारू रवि ने कहा, “KCR ने आदिवासियों के लिए कोई ख़ास काम तो छोड़िए, ज़रूरी काम भी नहीं किया था. लेकिन अब तो चुनाव का समय आ रहा है. इसलिए उन्हें सत्ता में लौटने के लिए आदिवासी का साथ चाहिए. अब वो कुछ अच्छी घोषणाएँ ज़रूर कर रहे हैं. उम्मीद है उन पर अमल भी होगा.”

इससे पहले आदिवासियों ने नेकलेस रोड से एनटीआर स्टेडियम तक विशाल रैली निकाली. रैली ने राज्य की समृद्ध आदिवासी संस्कृति को प्रदर्शित किया. वहीं सीएम केसीआर ने इससे पहले हैदराबाद में कुमारम भीम आदिवासी भवन संत सेवालाल बंजारा भवन का उद्घाटन किया.

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