महाराष्ट्र को अक्सर भारत का सबसे अमीर राज्य कहा जाता है, लेकिन इसी राज्य के भीतर नंदुरबार मौजूद है — महाराष्ट्र का सबसे गरीब ज़िला, जहाँ विकास आज भी एक अधूरा सपना है.
सतपुड़ा की पहाड़ियों और घने जंगलों में छिपा नंदुरबार राज्य के भीतर मौजूद गहरी असमानता को उजागर करता है.
यहाँ की 70 प्रतिशत से ज़्यादा आबादी आदिवासी समुदायों की है, जिनका जीवन जंगल और प्रकृति से जुड़ा है, लेकिन साथ ही रोज़मर्रा के संघर्ष और ख़तरों से भी भरा हुआ है.
इस ग्राउंड रिपोर्ट में @MainBhiBharat के संपादक श्याम सुंदर सतपुड़ा के दुर्गम जंगलों में पहुँचकर आदिवासी जीवन को बेहद क़रीब से समझते हैं.
आदिवासी महिलाओं के साथ चलकर वे पानी लाने की उस थकाऊ और जोखिम भरी प्रक्रिया के गवाह बनते हैं, जहाँ हर दिन लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, कठिन रास्तों पर भारी घड़े उठाने होते हैं और सिर्फ़ पीने के पानी के लिए चोट लगने तक का ख़तरा बना रहता है.
यह रिपोर्ट आदिवासी महिलाओं के उस अदृश्य संघर्ष को सामने लाती है, जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, और साथ ही यह सवाल खड़ा करती है कि महाराष्ट्र के सबसे उपेक्षित ज़िलों में से एक में विकास और समानता का असली मतलब क्या है.

