केरल: आदिवासी बस्ती में आवारा जानवरों का डर, आबादी को कम करने के लिए चलेगा अभियान

स्वास्थ्य एवं पंचायत अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में आवारा कुत्तों वाली आदिवासी कॉलोनियों में यह स्थिति बनी हुई है, और यह एक बड़ी चुनौती है.

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केरल के कोल्लम ज़िले की मुल्लूमला आदिवासी बस्ती की 17 साल की एक लड़की की रेबीज़ से मौत के बाद पिरावंतूर ग्राम पंचायत ने ऐनिमल बर्थ कंट्रोल (Animal Birth Control – ABC) कार्यक्रम शुरू करने के लिए क़दम उठाए हैं.

लड़की में पिछले महीने रेबीज़ के लक्षण उठे थे, जिससे उसने दम तोड़ दिया. उसकी मौत की वजह पिछले शनिवार को पोस्टमॉर्टम के बाद पता चली. अब इसी आदिवासी इलाक़े से एक और संदिग्ध रेबीज़ मौत की भी ख़बर मिली है. स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों पीड़ितों को एक ही कुत्ते ने काटा था.

मंगलवार को पंचायत अध्यक्ष आर. जयन ने द हिंदू को बताया, “दूसरा पीड़ित उसी कॉलोनी का एक वरिष्ठ नागरिक था. हालांकि उनमें हाल ही में रेबीज़ के लक्षण विकसित हुए थे, लेकिन दोनों को लगभग आठ महीने पहले एक कुत्ते ने काटा था. पास के चेंबनरुवी में एक लड़की पर भी उसी आवारा कुत्ते ने हमला किया था, लेकिन उसने समय पर वैक्सीन लगवा लिया था.”

स्वास्थ्य एवं पंचायत अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में आवारा कुत्तों वाली आदिवासी कॉलोनियों में यह स्थिति बनी हुई है, और यह एक बड़ी चुनौती है.

इसके अलावा जागरुकता की कमी और वैक्सीन लेने में हिचकिचाहट भी बड़े मुद्दे हैं. पीड़ित के सभी प्राथमिक संपर्कों सहित कुल 27 लोगों को अब रैबीज़ का वैक्सीन लगाया गया है, लेकिन उन्हें इसके लिए मनाना एक बड़ी चुनौती साबित हुई थी.

हालांकि आदिवासी बस्ती के लोगों का कहना है कि जिस कुत्ते ने दोनों पीड़ितों को काटा ता, वह इस बस्ती का नहीं है. लेकिन इस इलाक़े में कई आवारा कुत्ते हैं, जो दूसरे बीमार जानवरों के संपर्क में आते हैं.

बस्ती के हर घर में चार से पांच कुत्ते हैं. अब एबीसी कार्यक्रम को लागू करके कुत्तों की आबादी को कम करने की योजना बन रही है. इस कार्यक्रम को लागू करने के अलावा सभी आवारा जानवरों का वैक्सिनेशन भी किया जाएगा.

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