कर्नाटक: आदिवासी मामलों पर शोध के लिए नई यूनिवर्सिटी

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कर्नाटक के चामराजनगर के लोगों की लंबे समय से एक मांग है – इस सीमावर्ती ज़िले में एक स्वतंत्र यूनिवर्सिटी हो. और यह मांग अब जल्द पूरी हो सकती है.

मैसूर यूनिवर्सिटी (UoM) के कुलपति जी हेमंता कुमार के नेतृत्व में एक एक्सपर्ट समिति ने सरकार से सिफारिश की है कि ज़िले में एक यूनिवर्सिटी स्थापित की जाए, जो खासतौर पर आदिवासी मामलों के शोध और पढ़ाई पर केंद्रित हो.

राज्य के उच्च शिक्षा विभाग ने चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था. इस समिति पर ज़िम्मा था कि वो चामराजनार में डॉ बीआर अंबेडकर पोस्टग्रैजुएट सेंटर को एक पूर्ण यूनिवर्सिटी में बदलने की संभावना को देखे. इस सेंटर की स्थापना 2010 में हुई थी, जब वीजी तलवार मैसूर यूनिवर्सिटी के कुलपति थे.

इस सेंटर की शुरुआत सिर्फ तीन कोर्सेस से हुई थी, और अब यह 10 कोर्स पढ़ाए जाते हैं, और 800 से ज़्यादा छात्र दाखिल हैं. समिति के संयोजक राज्य उच्च शिक्षा परिषद के कार्यकारी निदेशक गोपालकृष्ण जोशी हैं.

हेमंता कुमार ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया कि उनकी रिपोर्ट तैयार है, और वो इसे सरका को आज सौंपेंगे. ज़िले में आदिवासियों की आबादी को देखते हुए स्थापित होने के बाद नई यूनिवर्सिटी आदिवासी मामलों पर ध्यान केंद्रित करेगी.

इसे झारखंड की आदिवासी यूनिवर्सिटी की तर्ज़ पर ही स्थापित करने का प्रस्ताव है. ज़िला प्रशासन ने चामराजनगर शहर के पास यूनिवर्सिटी के लिए 100 एकड़ आवंटित करने का आश्वासन भी दिया है.

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