तालाब से मछली ‘चुराने’ के आरोप में सात पंडो आदिवासियों की बेरहमी से पिटाई, सभी आरोपी गिरफ़्तार

एफ़आईआर के मुताबिक़ पंडो आदिवासी समुदाय के सात पीड़ितों पर 15 जून को गांव के एक तालाब से मछलियां चुराने का आरोप लगाया गया, और उन्हें जबरन गांव के सरपंच के पति सत्यम यादव के फ़ार्महाउस ले जाया गया.

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छत्तीसगढ़ के बलरामपुर ज़िले में एक तालाब से मछलियां चुराने के आरोप में एक नाबालिग लड़के सहित सात पंडो आदिवासियों की लाठियों से पिटाई की गई. उसके बाद गांव के सरपंच के पति समेत दस लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

मामला 15 जून को त्रिकुंडा थाना क्षेत्र के चेरा गांव का है. लेकिन पीड़ितों में से एक की शिकायत के बाद सोमवार को ही मामला दर्ज किया गया.

एफ़आईआर के मुताबिक़ पंडो आदिवासी समुदाय के सात पीड़ितों पर 15 जून को गांव के एक तालाब से मछलियां चुराने का आरोप लगाया गया, और उन्हें जबरन गांव के सरपंच के पति सत्यम यादव के फ़ार्महाउस ले जाया गया.

एफ़आईआर में यह भी लिखा है कि फ़ार्महाउस पर, सत्यम यादव और दूसरे लोगों ने ‘जन चौपाल’ का आयोजन किया, जिसके दौरान सभी सात लोगों को लाठियों से बेरहमी से पीटा गया.

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो का ग्रैब

इस क्रूरता का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल भी हुआ है.

एक वीडियो क्लिप में पीड़ितों को एक पेड़ पकड़कर एक-एक करके खड़े होने के लिए कहा जा रहा है. वीडियो में एक आदमी उनकी पीठ पर बार-बार लाठियां मारता नज़र आ रहा है. विरोध करने पर पीड़ितों को थप्पड़ मारा गया और गालियां दी गईं.

पुलिस अधिकारी के मुताबिक़ आरोपियों ने पीड़ितों पर मछली चुराने और उन्हें खाने का आरोप लगाते हुए 35,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया. आरोपियों ने पीड़ितों को पुलिस के पास न जाने की धमकी भी दी.

पीड़ितों की शिकायत के बाद आरोपियों पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

आरोपियों को स्थानीय अदालत ने फ़िलहाल न्यायिक हिरासत में भेजा है.

पंडो आदिवासी समुदाय पीवीटीजी की श्रेणी में आते हैं, और बेहद ग़रीबी में जीते हैं. यह छोटे किसान होते हैं, और आजीविका के लिए दैनिक मज़दूरी और वनोपज पर निर्भर हैं.

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