आदिवासियों को राशन कार्ड के लिए विशेष कैंप, हाईकोर्ट कुपोषण पर सख़्त, भूख से मौत जारी

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कल ही यानि सोमवार को महाराष्ट्र सरकार को राज्य के आदिवासी इलाक़ों में कुपोषण से होने वाली बच्चों की मौत के लिए फटकार लगाई थी. आज महाराष्ट्र में आदिवासी विकास विभाग ने राशनकार्ड और जाति प्रमाणपत्र जारी करने के लिए एक विशेष कैंप लगाने का ऐलान किया है.

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पिछले दो दिनों में आदिवासियों से जुड़ी दो ख़बर महाराष्ट्र से मिली हैं. इनमें पहली ख़बर आदिवासियों को राशन कार्ड देने से जुड़ी है.

दूसरी ख़बर सोमवार को आई थी, जिसमें आदिवासियों में कुपोषण पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीरता दिखाई थी..और तीसरी ख़बर बरसों से आ रही है, आदिवासियों में कुपोषण गंभीर समस्या.

महाराष्ट्र में आदिवासी विकास विभाग ने राशनकार्ड और जाति प्रमाणपत्र जारी करने के लिए एक विशेष कैंप लगाने का ऐलान किया है.

इस कैंप में उन आदिवासियों को राशन कार्ड या जाति प्रमाण पत्र दिए जाएंगे, जिन्हें अभी तक ये दस्तावेज़ नहीं मिल पाए हैं.

राज्य का आदिवासी विभाग जनजातियों के लिए अलग अलग कल्याणकारी और विकास की योजनाएँ चलाता है. इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए राशनकार्ड और जाति प्रमाण पत्र होना आवश्यक होता है.

जब तक आदिवासी ग़रीब के पास ये दस्तावेज़ नहीं होते हैं यह माना जाता है कि वो इन योजनाओं या सुविधाओं का हक़दार नहीं है. इन सुविधाओं में राशन से लेकर स्वास्थ्य और दूसरी सुविधाएँ भी शामिल होती हैं.

आदिवासी विकास विभाग के कमिश्नर हीरालाल सोनवाणे के अनुसार सितंबर महीने में ये स्पेशल कैंप लगाए जाएँगे. उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में आदिवासी मामलों के मंत्री केसी पड़वी के आदेश पर ये कैंप लगाने का फ़ैसला किया गया है. 

इन कैंपों की निगरानी सीनियर ऑफ़िसर करेंगे. 

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कल ही यानि सोमवार को महाराष्ट्र सरकार को राज्य के आदिवासी इलाक़ों में कुपोषण से होने वाली बच्चों की मौत के लिए फटकार लगाई थी.

कोर्ट ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर इन मौतों पर विराम नहीं लगा तो वो कड़ी कार्रवाई केरगा.

चीफ़ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जीएस कुलकर्णी की बेंच 2007 में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

इस याचिका में कुपोषण की वजह से राज्य के मेलघाट इलाक़े में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की मौतों की ज़्यादा संख्या का ज़िक्र था.

याचिका ने इलाक़े के सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्त्री रोग विशेषज्ञों, बाल रोग विशेषज्ञों और रेडियोलॉजिस्ट की कमी पर भी चिंता जताई.

याचिकाकर्ता ने सोमवार को हाई कोर्ट को सूचित किया कि पिछले एक साल में इस इलाक़े में कुपोषण के चलते 73 बच्चों की मौत हुई है.

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