तमिलनाडु: आज़ादी के बाद अब जाकर मिला आदिवासियों को जनजाति प्रमाण पत्र

प्रमाण पत्र मिलने के बाद ग्रामीणों ने कहा कि उनकी मांग आज़ादी के बाद से चली आ रही है. उनका कहना है कि अधिकारियों ने हमेशा बेवजह उनके प्रस्ताव और आवेदन अस्वीकार कर दिए. अब उन्हें उम्मीद है कि इस प्रमाण पत्र की मदद से वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठा पाएंगे.

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तमिलनाडु के ईरोड ज़िले में सत्यमंगलम टाइगर रिज़र्व (STR) से सटे तलवाड़ी और उसके आसपास के गांवों के 264 आदिवासी लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय प्रमाण पत्र सौंपे गए. इसके साथ ही इन ग्रामीणों की लंबे समय से लंबित मांग पूरी हो गई.

इन गांवों में चोलगर, उरली और लिंगायत समुदायों के लोग रहते हैं. ग्रामीणों ने अपने सामुदायिक प्रमाण पत्र के लिए पिछले कुछ दशकों में ज़िला प्रशासन से कई बार आवेदन किया था.

इस दशकों पुरानी मांग के बारे में जब कलेक्टर एच कृष्णनुण्णी को पता चला तो उन्होंने गोबिचेट्टीपलायम राजस्व मंडल अधिकारी (RDO) पलनीदेवी और तलवाड़ी के तहसीलदार उमामहेश्वरन को इस मामले को जल्द से जल्द निपटाने के लिए कहा.

उन्होंने खुद भी आदिवासियों से इस बारे में पूछताछ की. जांच में पाया गया कि ग्रामीणों की सामुदायिक प्रमाण पत्र की मांग कई दशकों पुरानी है. आरडीओ और तहसीलदार ने भी अपनी जांच में पाया कि ग्रामीण एसटी प्रमाण पत्र प्राप्त करने के पात्र हैं.

कलेक्टर ने रविवार को तलवाड़ी का दौरा किया, आदिवासी ग्रामीणों से बातचीत की और 264 लोगों को एसटी समुदाय के प्रमाण पत्र जारी किए.

प्रमाण पत्र मिलने के बाद ग्रामीणों ने कहा कि उनकी मांग आज़ादी के बाद से चली आ रही है. उनका कहना है कि अधिकारियों ने हमेशा बेवजह उनके प्रस्ताव और आवेदन अस्वीकार कर दिए. अब उन्हें उम्मीद है कि इस प्रमाण पत्र की मदद से वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठा पाएंगे.

जाति/जनजाति प्रमाण पत्र के फ़ायदे

जाति/जनजाति प्रमाण पत्र जारी करने का मुख्य उद्देश्य राज्य/केंद्र सरकार के अधीन आरक्षित पदों और सेवाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के वास्तविक उम्मीदवारों की पहुंच को बढ़ाना है.

इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों में रिज़र्वेशन और अन्य सुविधाएं मिलना भी इस प्रमाण पत्र से आसान हो जाती हैं.

(इस आर्टिकल में लगी तस्वीर उरली आदिवासी समुदाय के लोगों की है, लेकिन प्रतीकात्मक है)

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