जम्मू-कश्मीर में आदिवासी सरकार की प्राथमिकता पर हैं – मनोज सिन्हा

सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के जनजातीय समुदायों का विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है और जम्मू-कश्मीर के इतिहास में पहली बार हम सोमवार से वन अधिकार अधिनियम के तहत अधिकार सौंपने जा रहे हैं.

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जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को कहा कि आदिवासी समुदायों का विकास उनकी प्राथमिकताओं में से एक है.  उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों को लघु वनोपज पर अधिकार मिलेगा.

सिन्हा ने यहां राजभवन में गुर्जर-बकरवाल और गद्दी-सिप्पी समुदायों के एक प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए यह बात कही. उपराज्यपाल ने कहा कि विकास में आदिवासियों की हिस्सेदारी तय की जाएगी.

उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में सामाजिक समानता की प्रतिबद्धता के साथ, पिछले कुछ महीनों में जम्मू-कश्मीर के सभी आदिवासी समुदायों को उचित अधिकार देने के लिए कई फैसले लिए हैं.

सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के जनजातीय समुदायों का विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है और जम्मू-कश्मीर के इतिहास में पहली बार हम सोमवार से वन अधिकार अधिनियम के तहत अधिकार सौंपने जा रहे हैं.

यह देखते हुए कि पहले जम्मू-कश्मीर के आदिवासियों को पूर्ण अधिकार नहीं दिए गए थे, उपराज्यपाल ने कहा कि उनके प्रशासन ने वन अधिकार अधिनियम को लागू करके उनके लिए विकास लाने की कोशिश की है.

केंद्र शासित प्रदेश सरकार ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (TRIFED) के साथ मिलकर संग्रह, मूल्यवर्धन, पैकेजिंग और वितरण के लिए बुनियादी ढांचा स्थापित करेगी.

बकरवाल समुदाय भेड़ बकरी पालने का काम करता है

इसके अलावा, युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए, 15 आदिवासी एसएचजी (Self Help Groups) का एक समूह स्थापित किया जाएगा और प्रति समूह 15 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे.

उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समुदायों के विकास के लिए व्यापक योजना को लागू करने के लिए जमीनी हकीकत पर आधारित प्रभावी नीति निर्माण के लिए दो महीने का सर्वे किया गया है.

उपराज्यपाल ने कहा कि प्रशासन ने चिकित्सा शिविरों, पशु यार्डों, पशु चिकित्सा देखभाल और पर्याप्त सुरक्षा के प्रावधानों के अलावा मौसमी अस्थायी आबादी को समायोजित करने के लिए 28 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से आठ स्थानों पर पारगमन आवास विकसित करने का निर्णय लिया है.

उन्होंने बताया कि बेहतर स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं प्रदान करने और प्रवासी आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए, यूटी प्रशासन एक आदिवासी स्वास्थ्य योजना लेकर आया है, जिसके लिए 15 करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं.

सरकार स्थिर आबादी के लिए स्वास्थ्य उप-केंद्र और प्रवासी आबादी के लिए मोबाइल चिकित्सा युनिट  बनाएगी. उन्होंने कहा कि यह अच्छे डॉक्टरों और मशीनरी के साथ पूरी तरह से आधुनिक होगा और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, स्वास्थ्य विभाग और आदिवासी मामलों के विभाग के सहयोग से चलेगा.

युवाओं के लिए एक स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने के मुद्दे पर, उपराज्यपाल ने 1500 मिनी भेड़ फार्म स्थापित करने की घोषणा की, जो इस वित्तीय वर्ष में 3,000 युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करेगा.

यह कार्यक्रम एक बार की पहल नहीं होगी और हर साल 33 प्रतिशत नए भेड़ फार्म स्थापित किए जाएंगे.

सिन्हा ने कहा कि मिशन यूथ के तहत प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, विपणन और परिवहन सुविधाएं प्रदान करने के अलावा 16 करोड़ रुपये की लागत से कम से कम 2,000 युवाओं को डेयरी क्षेत्र से जोड़ने के लिए 16 दूध गांव स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है.

उपराज्यपाल ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने आदिवासी युवाओं को कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ने का फैसला किया है, जिनमें से 300 कौशल सेटों की पहचान की गई है.

उन्होंने कहा कि शुरुआत में 500 युवाओं का चयन किया जाएगा और उन्हें व्यावसायिक पायलट, रोबोटिक्स और प्रबंधन जैसे विशेषज्ञ पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षित किया जाएगा.

सिन्हा ने कहा कि प्रशासन ने आदिवासी पर्यटन गांव बनाने का निर्णय लिया है और पहले चरण में ऐसे 15 गांवों का चयन किया जाएगा और 3 करोड़ रुपये की राशि से यह काम शुरू किया जाएगा.

इसके अलावा यदि समुदाय का कोई भी युवा पर्यटन व्यवसाय शुरू करना चाहता है, तो सरकार उन्हें प्रशिक्षण और 10 लाख रुपये तक की आसान वित्तीय सहायता प्रदान करेगी.

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