मध्य प्रदेश: भाजपा विधायक ने करोड़ों की ज़मीन हड़पी, गोंड आदिवासी परिवार ने लगाया आरोप

गोंड परिवार ने 18 अक्टूबर, 2021 को एसडीएम के सामने एक आवेदन दिया, जिसमें दावा किया गया था कि सीधी जिले के गोपद बनास तहसील के हरबरो गांव में मौजूद 17.41 एकड़ भूमि महकम सिंह के नाम पर थी. परिवार का कहना है कि ज़मीन 1972 तक महकम सिंह के नाम पर थी, और उसके बाद कभी किसी को नहीं बेची गई.

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मध्य प्रदेश के सीधी जिले से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक मौजूदा विधायक पर गोंड आदिवासी समुदाय के एक परिवार ने उनकी ज़मीन हड़पने का आरोप लगाया है.

गोंड आदिवासी महकम सिंह ने एसडीएम की अदालत में एक मामला दर्ज कराया है. अपनी शिकायत में उन्होंने कहा है कि चार बार के भाजपा विधायक केदारनाथ शुक्ला और उनके भाई मार्कंडेय शुक्ला ने उनके परिवार की ज़मीन छीन ली, जो दशकों से उनके पास थी.

गोंड परिवार ने 18 अक्टूबर, 2021 को एसडीएम के सामने एक आवेदन दिया, जिसमें दावा किया गया था कि सीधी जिले के गोपद बनास तहसील के हरबरो गांव में मौजूद 17.41 एकड़ भूमि महकम सिंह के नाम पर थी. परिवार का कहना है कि ज़मीन 1972 तक महकम सिंह के नाम पर थी, और उसके बाद कभी किसी को नहीं बेची गई.

द वायर के मुताबिक़ ज़िले के राजस्व विभाग के दस्तावेज़ भी 1972 तक महकम सिंह के नाम पर ही ज़मीन को दिखाते हैं. हालांकि, ज़मीन का स्वामित्व बाद में शुक्ला परिवार को चला गाय.

गोंड परिवार को इस बात का तब पता चला, जब वो करीब तीन महीने पहले आया, जब उन्होंने महकम सिंह के चार बेटों और उनके परिवारों के बीच ज़मीन का बंटवारा करने के लिए राजस्व विभाग से संपर्क किया.

परिवार के वकील मदन प्रताप सिंह ने कहा कि मामला एमपी भूमि राजस्व संहिता, 1959 की धारा 170 (बी) का उल्लंघन है. इस घारा के तहत अगर कोई गैर-आदिवासी आदिवासी कृषि भूमि खरीदता है, और एक साल के अंदर उसकी सूचना एसडीएम, जिला मजिस्ट्रेट और राजस्व विभाग को नहीं देता है, तो ज़मीन उस आदिवासी व्यक्ति को वापस कर दी जाएगी जिसका उसपर स्वामित्व था. अगर वह व्यक्ति ज़िंदा नहीं है, तो ज़मीन उसके कानूनी उत्तराधिकारियों को वापस कर दी जाएगी.

वकील का कहना है कि इस मामले की सूचना एसडीएम, कलेक्टर और राजस्व अधिकारी को कभी नहीं दी गई, और न ही परिवार ने कभी किसी को जमीन बेची है.

शिकायत करने वालों ने सीधी ज़िला कलेक्टर, एसपी और राजस्व विभाग के भूमि रिकॉर्ड के साथ एक लिखित शिकायत दी है, यह देखने के लिए कि भूमि का स्वामित्व महकम सिंह की सहमति के बिना कैसे बदल गया. उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की है.

महकम सिंह के बेटे 80 साल के गुलाब सिंह का कहना है कि केदारनाथ शुक्ल के पिता उनकी ज़मीन पर मवेशी चराते थे, जिससे 1984-85 में विवाद खड़ा हुआ. “बदला लेने के लिए, उसने हमारे पिता को नंगा किया और उसे गाँव के चारों ओर घुमाया और हमें भगा दिया. तब से हम उस भूमि से दूर रहे, लेकिन उसे कभी नहीं बेचा,” गुलाब सिंह ने दावा किया.

परिवार का यह भी दावा है कि उनकी तरह गांव के दूसरे गोंड परिवारों की भी इसी तरह की शिकायतें हैं, लेकिन वो आधिकारिक शिकायर दर्ज कराने से डरते हैं.

भाजपा विधायक शुक्ल ने द वायर को टिप्पणी देने से मना कर दिया क्योंकि मामला अदालत में है.

सीधी के एसपी पंकज कुमावत ने बताया, “शिकायत मिलने के बाद हमने मामले की जांच के लिए राजस्व विभाग से रिपोर्ट मांगी है. रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी.”

(Image Courtesy: The Wire)

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