छत्तीसगढ़ सरकार ओबीसी, एससी और एसटी की कल्याणकारी योजनाओं के लिए अलग विभाग बनाएगी

पहले तीनों विभागों का काम एक विभाग द्वारा देखा जाता था, जिस कारण योजनाएं सुचारू रूप से लागू नहीं हो पाती थीं. छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा कि अब अलग-अलग विभाग बन जाने के बाद योजनाएं अच्छी तरह से लागू की जा सकेंगी.

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2023 में होने वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है लेकिन इससे पहले कांग्रेस सरकार ने राज्य के मुख्य समुदायों के लिए अहम फैसला लिया है. छत्तीसगढ़ सरकार ने अनुसूचित जाति (Scheduled Castes), अनुसूचित जनजाति (Scheduled tribes) और पिछड़़ा वर्ग (Other backward class) के कल्याण और विकास के लिए अलग-अलग विभाग बनाने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी.

मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया जिसमें अन्य मंत्री और अधिकारी भी मौजूद थे. कैबिनेट बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि अब तक एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों से संबंधित कार्यों का प्रबंधन एक विभाग द्वारा किया जाता था, लेकिन अब इसे तीन विभागों में बांटा जाएगा.

उन्होंने बताया कि इससे इन वर्गों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का अधिक सुव्यवस्थित तरीके से क्रियान्वयन हो सकेगा. मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में ‘अन्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद’ और ‘अनुसूचित जाति सलाहकार परिषद’ का गठन किया जाएगा. दरअसल अनुसूचित जनजाति सलाहकार परिषद का गठन पहले ही हो चुका है.

सीएम बघेल ने ट्विटर पर लिखा, “हमने एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के कल्याण और विकास के लिए अलग-अलग विभागों के गठन का ऐतिहासिक फैसला लिया है.”

बघेल ने ट्वीट किया, “छत्तीसगढ़ में एससी वर्ग की बेहतरी सुनिश्चित करने और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए एससी सलाहकार परिषद के गठन का निर्णय लिया गया है.”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ में ओबीसी के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हमने एक सलाहकार परिषद गठित करने का बड़ा फैसला लिया है. इस परिषद का गठन इस वर्ग के लोगों के लिए कार्यक्रम आयोजित करने और उनके कार्यान्वयन के लिए सिफारिशें प्राप्त करने में मदद करेगा.”

2011 की जनगणना के मुताबिक छत्तीसगढ़ 30.62 फीसदी आदिवासी आबादी वाला आदिवासी बहुल राज्य माना जाता है. छत्तीसगढ़ में ओबीसी समुदायों का भी एक बड़ा हिस्सा 46 से 48 फीसदी है. वहीं 2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जाति समुदाय राज्य की आबादी का 12.82 फीसदी है.

ऐसे में ये सभी समुदाय, विशेष रूप से ओबीसी और अनुसूचित जनजाति, राज्य में एक प्रमुख चुनावी भूमिका निभाते हैं और कोई भी राजनीतिक दल उन्हें अपने पक्ष में रखना चाहता है.

राज्य सरकार के एक नोट में कहा गया है कि मुख्यमंत्री इस ओबीसी सलाहकार परिषद के अध्यक्ष होंगे और विभाग के प्रभारी मंत्री उपाध्यक्ष होंगे. परिषद में 40 सदस्य होंगे, जिनमें से कम से कम 10 ओबीसी विधायक होंगे, जबकि बाकी सदस्य राज्य सरकार द्वारा मनोनीत होंगे.

20 सदस्यीय एससी सलाहकार परिषद का नेतृत्व भी मुख्यमंत्री करेंगे जबकि विभाग के प्रभारी मंत्री उपाध्यक्ष होंगे. परिषद में कम से कम पांच एससी विधायक होंगे और शेष सदस्य राज्य सरकार द्वारा नामित किए जाएंगे. विभाग के सचिव इस परिषद के सचिव के रूप में कार्य करेंगे.

सीएम बघेल ने बताया कि राज्य में अनुसूचित जनजाति से संबंधित विषय पर अनुशंसा के लिए छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति सलाहकार परिषद का गठन पहले ही हो चुका है.

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