फूलमति ने 3 साल के सिद्धू का गला काट दिया, ख़ुद ही गाँव में घूम घूम कर हत्या की सूचना दी

फूलमति और गंगा चैती मना कर लौटे थे. चैती में उन्होंने जम कर शराब पी थी. दावत के बाद गंगा और फूलमति अपने घर लौट आए थे. घर लौट कर गंगा तो सो गया लेकिन चैती को नींद नहीं आई. फिर उसे ना जाने क्या सूझा और उसने सोते हुए अपने तीन साल के बेटे सिद्धू का गला काट दिया.

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फूलमति मुदली ने नशे की हालत में अपने तीन साल के बेटे सिद्धू का गला काट दिया. इतना ही नहीं जब सुबह हुई तो गाँव में घूम घूम कर उसने यह बात सबको बताई. उसने सबको बताया की रात को उसने चाकू से अपने बेटे का गला काट दिया है.

उसकी बातें सुन कर गाँव के कई लोग दौड़ कर उसके घर पहुँचे और देखा कि उसका बेटा मरा पड़ा है. ऐसा लगता है कि जब बच्चा सो रहा था और नशे में डूबी फूलमति ने उसका गला काट दिया था. 

बच्चे के आस-पास खून फैला था. बच्चे का बाप यानि फूलमति मुदली का पति अभी भी सोया हुआ था. 

यह घटना ओडिशा के कोरापुट ज़िले दसमंतपुर ब्लाॉक में लुकुमारी गाँव की है. पुलिस ने फूलमति को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस को फूलमति ने बताया कि वो और उसका पति गंगा अपने पड़ौसियों के साथ चैती त्योहार मना कर लौटे थे.

इस दौरान उन्होंने जम कर शराब पी थी. दावत के बाद गंगा और फूलमति अपने घर लौट आए थे. जब वो घर लौटे तो गंगा तो सो गया लेकिन चैती को नींद नहीं आई. फिर उसे ना जाने क्या सूझा और उसने सोते हुए अपने तीन साल के बेटे सिद्धू का गला काट दिया.

सुबह हुई तो भी फूलमति नशे की ही हालत में थी. उसने नशे की हालत में ही घर से निकल कर गाँव में शोर मचा कर अपने बच्चे की हत्या की जानकारी लोगों को दी थी. 

पुलिस का कहना है कि पहली नज़र में यह मामला नशे की हालत में हत्या का लगता है. लेकिन पुलिस इस मामले की छानबीन कर रही है.

पुलिस का कहना है कि गिरफ़्तारी के समय भी फूलमति नशे की हालत में थी. लेकिन जब दोपहर बाद उसका नशा उतरा तो उसे अपने अपराध का अहसास हुआ है. अब वो पछता रही है.

सिद्धू के अलावा फूलमति के तीन बच्चे और हैं. इनमें दो बेटे और एक बेटी है. 

यह घटना 13-14 अप्रैल, बुधवार और गुरूवार के बीच की रात की है.

आदिवासी समुदायों में पर्व या फिर किसी भी उत्सव में शराब पीना आम बात है. इस मामले में आदमी और औरत में कोई फ़र्क़ नहीं है. सभी मिल कर शराब पीते हैं. 

लेकिन यह भी सच है कि शराब आदिवासी समुदायों में एक बड़ी समस्या भी बनती जा रही है. बड़ी तादाद में आदिवासी शराब के आदी हो जाते हैं. शराब की वजह से परिवार और समाज में कई तरह की परेशानियाँ देखी जाती हैं.

हाल ही में MBB की टीम ने महाराष्ट्र के पालघर ज़िले में कई आदिवासी गाँवों में इस समस्या को क़रीब से देखने समझने की कोशिश की थी. हालाँकि ओडिशा की दुखद घटना सामने आई है, उसमें हत्या एक औरत ने की है.

लेकिन आदिवासी समुदायों में शराब की वजह से औरतों को ज़्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है. इस बात को समझने के लिए आप हमारी यह ग्राउंड रिपोर्ट देख सकते हैं. 

इस रिपोर्ट को तैयार करने के दौरान हमने पाया कि शराब की वजह से आदिवासी समुदायों में कम उम्र में ही लोगों की मौत हो रही है. निशा कही यह कहानी आदिवासी समाज में बन रहे इस मसले को कुछ हद तक समझने में मदद कर सकती है.

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