दाहोद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आदिवासी सम्मेलन को करेंगे संबोधित

आदिवासी विरोध के दबाव में गुजरात की सरकार को पार तापी परियोजना को टालना पड़ा है. लेकिन उसके बावजूद कई आदिवासी संगठन इस मामले पर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इन संगठनों की माँग है कि इस परियोजना को पूरी तरह से रद्द किया जाना चाहिए. इस आंदोलन की वजह से आदिवासी इलाक़ों में बीजेपी के ख़िलाफ़ जो माहौल बना है, पार्टी उस असर कम करना चाहेगी. बीजेपी उम्मीद करेगी की प्रधानमंत्री मोदी के असर से आंदोलन के असर की काट की जा सकती है.

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) अपने तीन दिन के गुजरात दौरे पर है. इस दौरे में बुधवार यानि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक आदिवासी महासम्मेलन (Tribal Convention)) को संबोधित करेंगे. यह सम्मेलन दाहोद जिले में आयोजित किया जा रहा है. जिला प्रशासन के अधिकारियों ने कहा कि इस कार्यक्रम में दो लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. 

इस सम्मेलन के लिए एक भव्य पंडाल तैयार किया गया है. दाहोद प्रशासन ने मंगलवार को एक विज्ञप्ति में कहा, इस आयोजन के लिए बनाया गया गुंबद 600 मीटर लंबा और 132 फीट चौड़ा है. साथ ही पीने के पानी के साथ-साथ अग्नि सुरक्षा की व्यवस्था भी की गई है.  

दाहोद जिला प्रशासन ने सोमवार को कहा कि उसने सभी लोगों को व्यक्तिगत रूप से घर-घर आमंत्रण भेजा है. सम्मेलन में शामिल होने के लिए महिसागर, छोटा उदयपुर, पंचमहल और वडोदरा के आसपास के जिलों से जनजातीय आबादी को भी शामिल होने की उम्मीद है.  

जिला प्रशासन ने मीडिया को बताया है कि सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए 3000 पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है. 

गुजरात में इसी साल के आख़िर में विधान सभा चुनाव होंगे. यह माना जा रहा है कि गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बीजेपी आदिवासी समुदायों तक पहुँचने की कोशिश कर रही है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात से पहले मध्य प्रदेश में आदिवासी सम्मेलन को संबोधित कर चुके हैं.

गृह मंत्री अमित शाह के भी दौरे मध्य प्रदेश और राजस्थान के आदिवासी कार्यक्रमों में तय हो चुके हैं. पिछले विधान सभा चुनावों में राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के आदिवासी इलाक़ों में बीजेपी को आशा के अनुरूप सफलता नहीं मिली थी.

जहां तक गुजरात का सवाल है हाल ही में यहाँ पर पार-तापी परियोजना के विरोध में आदिवासियों ने ज़बरदस्त प्रदर्शन किया था. इस प्रदर्शन के बाद बीजेपी की राज्य सरकार ने घोषणा की है कि फ़िलहाल इस परियोजना पर अमल नहीं किया जाएगा.

आदिवासी विरोध के दबाव में गुजरात की सरकार को इस परियोजना को टालना पड़ा है. लेकिन उसके बावजूद कई आदिवासी संगठन इस मामले पर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इन संगठनों की माँग है कि इस परियोजना को पूरी तरह से रद्द किया जाना चाहिए.

इस आंदोलन की वजह से आदिवासी इलाक़ों में बीजेपी के ख़िलाफ़ जो माहौल बना है, पार्टी उस असर कम करना चाहेगी. बीजेपी उम्मीद करेगी की प्रधानमंत्री मोदी के असर से आंदोलन के असर की काट की जा सकती है. 

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