IIT-B में आरक्षण नीति की उपेक्षा, पिछले 12 साल में एक भी आदिवासी एसिस्टेंट प्रोफ़ेसर की नियुक्ति नहीं

पिछले 12 वर्षों में IIT-B में जो 317 उम्मीदवारों को एसिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया, उनमें 97% जनरल कैटेगरी से थे, 1.9% ओबीसी थे, 0.9% एससी थे, और एसटी कैटेगरी से एक भी नियुक्ति नहीं हुई.

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आईआईटी-बॉम्बे (IIT-B) ने 2006 के बाद अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ी जाति (OBC) श्रेणियों से एक भी एसोसिएट प्रोफेसर को भर्ती नहीं किया है. एक आरटीआई (RTI) के जवाब में यह जानकारी सामने आई है.

यह आरटीआई IIT-B के एक अनौपचारिक छात्र संगठन, अंबेडकर पेरियार फुले स्टडी सर्कल (Ambedkar Periyar Phule Study Circle) ने दायर की थी. इस आरटीआई के जवाब में हर श्रेणी में भर्ती किए गए उम्मीदवारों की गिनती थी, लेकिन शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों की संख्या नहीं बताई गई.

हालांकि आरटीआई में दिया गया डेटा जुलाई 2019 में शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल द्वारा लोकसभा में साझा किए गए आंकड़ों से मेल खाता है. पोखरियाल ने लोकसभा में कहा था कि देश के 23 IITs में 6,043 शिक्षक हैं, जिनमें से 2.5% अनुसूचित जाति (SC) से हैं, और सिर्फ़ 0.34% अनुसूचित जनजाति (ST) से थे.

पिछले 14 सालों में IIT-B ने सिर्फ़ एक एससी उम्मीदवार को एसोसिएट प्रोफेसर (Associate Professor) के रूप में नियुक्त किया है. जहां तक आदिवासियों की बात है, तो 2009 और 2020 के बीच एक भी एसटी उम्मीदवार एसिस्टेंट प्रोफेसर (Assistant Professor) के रूप में नियुक्त नहीं किया गया है.

इस अवधि में तीन एससी और छह ओबीसी उम्मीदवारों को एसिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया.

यानि पिछले 12 वर्षों में IIT-B में जो 317 उम्मीदवारों को एसिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया, उनमें 97% जनरल कैटेगरी से थे, 1.9% ओबीसी थे, 0.9% एससी थे, और एसटी कैटेगरी से एक भी नियुक्ति नहीं हुई.

इसी तरह एसोसिएट प्रोफेसर की पोस्ट पर 2006 और 2020 के बीच 97.7% जनरल कैटेगरी से थे, 2% एससी से, और एसटी और ओबीसी से एक भी नहीं.

IIT में सभी शिक्षक पदों का 10% आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित है. इसमें ओबीसी श्रेणी के लिए 27%, एससी के लिए 15%, एसटी के लिए 7.5%, और शारीरिक विकलांग (Physically Disabled) उम्मीदवारों के लिए 5%. 2019 तक यह आरक्षण सिर्फ़ एसिस्टेंट प्रोफेसर की पोस्ट के लिए लागू था.

आरक्षित श्रेणी में पिछड़े वर्ग का इतना कम प्रतिनिधित्व इसलिए अहम हैं क्योंकि पिछले जुलाई में एक विशेषज्ञ समिति ने शिक्षा मंत्रालय को एक प्रस्ताव में कहा था कि आईआईटी को उत्कृष्ट संस्थानों (Institutes of Excellence) की सूचि में शामिल किया जाए. इन संस्थानों को Central Educational Institutions (Reservation in Teachers’ Cadre) Act, 2019 के तहत जाति-आधारित आरक्षण से छूट दी गई है.

IIT-B का कहना है कि वो आरक्षण नीति का पालन करता है. आंकड़े बताते हैं कि 2020 में 26 एससी उम्मीदवार, दो एसटी उम्मीदवार और 20 ओबीसी उम्मीदवारों ने एसिस्टेंट प्रोफेसर के पोस्ट के लिए आवेदन दिए थे. इनमें से सिर्फ़ एक एससी उम्मीदवार को नियुक्त किया गया, और सभी एसटी और ओबीसी उम्मीदवारों के आवेदन खारिज कर दिए गए.

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