तेलंगाना सरकार ने पहली बार आदिवासियों के डंडारी-गुस्सादी नृत्य उत्सव के लिए जारी किए 1 करोड़ रुपये

मंडलियां अपने नृत्य कौशल का प्रदर्शन करने के लिए पड़ोसी गांवों का दौरा करती हैं. इन मंडलियों का हिस्सा बनने वाले युवाओं को किसी लड़की को प्रभावित करने और चतुर चाल चलकर उससे शादी करने का अवसर मिल सकता है.

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तेलंगाना के आदिवासियों के धार्मिक और सांस्कृतिक मामलों के महत्व को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार ने पहली बार डंडारी-गुस्सादी (Dandari-Gussadi) नृत्य उत्सव के आयोजन के लिए 1 करोड़ रुपये जारी किए हैं. सरकार के इस कदम से आदिलाबाद जिले के आदिवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई है.

हालांकि पहले की किसी सरकार ने इस नृत्य उत्सव के लिए न तो उत्सव को मान्यता दी थी और न ही कोई अनुदान आवंटित किया था. लेकिन इस बार तेलंगाना सरकार ने ये पहल की है.

जयनूर मंडल के मारलवई गांव के एक शिक्षक कनका अंबाजी राव ने कहा, “गुस्सादी आदिवासियों का एक प्राचीन लोक नृत्य है. वहीं डंडारी मंडली एक पखवाड़े तक उत्सव के दौरान इसका प्रदर्शन करती है. समृद्ध महत्व के बावजूद पहले की सरकारें धार्मिक और सांस्कृतिक मामलों को मान्यता देने में विफल रहीं. राज्य सरकार द्वारा अनुदान की मंजूरी के साथ प्रत्येक मंडली को 10,000 रुपये की राशि दी जा रही है.”

दिवाली आते ही सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उल्लास आदिलाबाद जिले की बस्तियों में व्याप्त हो गया. जिसमें नृत्य मंडलियों या डंडारियों ने लोक गीतों और ढोल की थाप पर अपनी शानदार चाल पेश की. आदिलाबाद जिले के पहाड़ी इलाकों में बसी आदिवासी बस्तियों में इसे लेकर जोश है.

राज गोंड और कोलम सहित आदिवासी नृत्य के मौसम की शुरुआत को चिह्नित करने के लिए पारंपरिक अनुष्ठान करते हैं. वे प्रस्तावना के रूप में मंडलियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मोर पंख और संगीत वाद्ययंत्रों से बने बड़े मुकुटों की पूजा करते हैं.

मंडलियां अपने नृत्य कौशल का प्रदर्शन करने के लिए पड़ोसी गांवों का दौरा करती हैं. इन मंडलियों का हिस्सा बनने वाले युवाओं को किसी लड़की को प्रभावित करने और चतुर चाल चलकर उससे शादी करने का अवसर मिल सकता है.

त्योहार के हिस्से के रूप में जातीय जनजातियां आदिवासियों का शोषण और उत्पीड़न करने वालों के चरित्रों को प्रस्तुत करके सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का चित्रण करते हुए व्यंग्य नाटक करती हैं. साथ ही महिला नर्तकियों की मंडली नृत्य कार्यक्रम की शुरुआत करेंगी.

इस दौरान दांडेपल्ली के गुडीरेवु गांव में पामदलपुरी काको के मंदिर निर्माण के लिए 30 लाख रुपये स्वीकृत किए गए. देवी के लिए एक स्थायी ढांचा बनाने के लिए भक्तों और आदिवासियों ने सरकार को धन्यवाद दिया.

दानाद्री मंडली एक प्रस्तावना के रूप में प्राचीन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. तेलंगाना, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों से संबंधित मंडलियों और आदिवासियों की मण्डली के साथ छोटा गाँव जीवित हो जाएगा.

(Image Credit: The Hindu)

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