झारखंड: आदिवासी भाषाओं के लिए अध्यापक भर्ती होंगे

राज्य में जनजातीय भाषाओं को बढ़ावा देने को लेकर विधानसभा के मॉनसून सत्र में सवाल उठे थे, जिसके जवाब में राज्य सरकार की तरफ से यही दलील दी गई थी कि पिछले चार शैक्षणिक वर्ष में अध्ययनरत छात्रों द्वारा चुने गए विषयों के आधार पर ही शिक्षकों की आवश्यकता का आकलन कमेटी द्वारा किया जाएगा.

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झारखंड के स्कूलों में आदिवासी भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है. राज्य के प्लस टू स्कूलों में जनजातीय भाषाओं के लिए शिक्षकों के पद सृजित किए जाएंगे. राज्य के 510 प्लस टू स्कूलों में आवश्यकता के अनुसार जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के अलावा कुछ अन्य विषयों के शिक्षकों के पद भी सृजित होंगे.

मिली जानकारी के मुताबिक इसे लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमिटी गठित की गई है. कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर न सिर्फ शिक्षकों के नए पद सृजित किए जाएंगे, बल्कि इसके साथ ही अनावश्यक पद भी खत्म किए जाएंगे. इस कमेटी की बैठक सात सितंबर को होगी.

सात सितंबर को होने वाली मीटिंग में सभी क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशकों को अपने प्रमंडलों की रिपोर्ट लेकर आना होगा, जिस आधार पर क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक हर एक स्कूलों में छात्रों का आकलन करने के बाद नए विषयों में शिक्षकों के पद सृजन करेगा. इसके साथ ही अप्रासंगिक विषयों में शिक्षकों के पदों को सरेंडर करने का प्रस्ताव भी मीटिंग में लिया जा सकता हैं.

दरअसल राज्य में जनजातीय भाषाओं को बढ़ावा देने को लेकर विधानसभा के मॉनसून सत्र में सवाल उठे थे, जिसके जवाब में राज्य सरकार की तरफ से यही दलील दी गई थी कि पिछले चार शैक्षणिक वर्ष में अध्ययनरत छात्रों द्वारा चुने गए विषयों के आधार पर ही शिक्षकों की आवश्यकता का आकलन कमेटी द्वारा किया जाएगा.

झारखंड छात्र संघ के अध्यक्ष एस अली तथा अन्य संगठनों ने भी उर्दू , राजनीति शास्त्र, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, दर्शनशास्त्र, आइटी, कंप्यूटर विज्ञान आदि विषयों में शिक्षकों के पद सृजन की मांग राज्य सरकार से की थी.

फिलहाल प्लस टू स्कूलों में 11 विषयों हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, अर्थशास्त्र, भूगोल, इतिहास, भौतिकी, रसायनशास्त्र, जीव विज्ञान, गणित और वाणिज्य में शिक्षकों के पद सृजित हैं.

(प्रतिकात्मक तस्वीर)

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