वेदांता बनाम आदिवासी हो तो क़ानून और सरकार किधर होंगे?

मामला झारसुगुड़ा पुलिस द्वारा दायर की गई एक एफ़आईआर का है. पुलिस ने शिकायतकर्ता को चार पेज की एफ़आईआर की दो कॉपी दीं – एक अंग्रेज़ी में, और एक हिंदी में. मज़े की बात यह है कि शिकायतकर्ता एक ग़रीब आदिवासी है, उसकी मातृभाषा उड़िया है, और वो हिंदी और अंग्रेज़ी नहीं जानता.

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ओडिशा विधानसभा ने आधिकारिक संचार (Official Communication) में राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा उड़िया भाषा के व्यापक उपयोग के लिए ओडिशा राजभाषा (संशोधन) विधेयक, 2018 पारित किया था. इसके तहत न सिर्फ़ ऐसा न करने के लिए दंड का प्रावधान है, बल्कि उड़िया इस्तेमाल करने के लिए इनाम भी है.

लेकिन हाल ही के एक मामले से साफ़ हो जाता है कि इसका पालन ज़रूरत के हिसाब किया जाता है.

मामला झारसुगुड़ा पुलिस द्वारा दायर की गई एक एफ़आईआर का है. पुलिस ने शिकायतकर्ता को चार पेज की एफ़आईआर की दो कॉपी दीं – एक अंग्रेज़ी में, और एक हिंदी में.

मज़े की बात यह है कि शिकायतकर्ता एक ग़रीब आदिवासी है, उसकी मातृभाषा उड़िया है, और वो हिंदी और अंग्रेज़ी नहीं जानता.

झारसुगुड़ा ज़िले के भुरकामुंडा में वेदांता कंपनी के ख़िलाफ़ इस आदिवासी, दिलीप ओराम ने एक शिकायत दर्ज की थी. दिलीप का आरोप था कि वेदांता के सुरक्षाकर्मियों ने उनके पिता 55 साल के बिहारी ओराम को अगवा कर प्रताड़ित किया.

आरोप है कि बोहारी ओराम को वेदांता की फ़ैक्ट्री परिसर में 15 दिनों तक रखा गया, और उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया. इसके लिए दिलीप ने बदमल थाने में वेदांता प्लांट के सुरक्षा अधिकारी राजेश यादव, मुकेश दिवाकर और पांडे के खिलाफ़ लिखित में शिकायत दर्ज कराई थी.

10 सितंबर को मामले की जांच शुरू की गई. पुलिस ने कंपनी के सुरक्षा अधिकारियों को हिरासत में लिया और उनसे पूछताछ की. बदमल पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफ़आईआर हिंदी और अंग्रेज़ी में है, और इसमें आईपीसी की धारा 341, 342, 323, 294, 506, 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है बदमल पुलिस वेदांता के अधिकारियों के साथ मिली हुई है, और मामले को रफ़ा-दफ़ा करने की कोशिश कर रही है.

बिहारी ओराम 25 अगस्त से लापता था. दो दिन बाद उसके बेटे दिलीप ने शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कर बिहारी की तलाश शुरू कर दी, लेकिन उसका पता नहीं चल सका. कुछ स्थानीय महिलाओं ने दावा किया कि उन्होंने वेदांत कंपनी के सुरक्षा गार्डों को बिहारी को ले जाते हुए देखा था.

इस बात का पता लगने पर ग्रामीणों ने कंपनी का विरोध किया, और इससे डर कर प्लांट के सुरक्षाकर्मियों ने 9 सितंबर को बिहारी को उसके गांव के बाहरी इलाक़े में छोड़ दिया. घर लौटकर बिहारी ने अपने परिवार को पूरी कहानी बताई.

वेदांता के पीआरओ प्रत्युष जेना ने ओडिशा पोस्ट को बताया कि पुलिस ने पूछताछ के लिए कंपनी के मुख्य सुरक्षा अधिकारी को हिरासत में लिया और बाद में उसे रिहा कर दिया. उन्होंने कंपनी के किसी भी तरह से इस घटना में शामिल न होने का भी दावा किया है.

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